संसद के मानसून सत्र के दौरान गुरुवार को राज्यसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की ‘मनुस्मृति’ संबंधी टिप्पणी पर जोरदार हंगामा हो गया। सत्ता पक्ष ने उनके बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए माफी की मांग की, जबकि सभापति ने विवादित टिप्पणी को सदन की कार्यवाही से हटाने का निर्देश दिया।
विधेयक पर चर्चा के दौरान खरगे ने सरकार पर शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक के मुद्दे पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में 152 परीक्षाओं के पेपर लीक हुए, लेकिन किसी भी दोषी को सजा नहीं मिली। उन्होंने सवाल उठाया कि जब लगातार पेपर लीक की घटनाएं हो रही थीं तो सरकार और जांच एजेंसियां क्या कर रही थीं। खरगे ने कहा कि शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का कम से कम छह प्रतिशत खर्च किया जाना चाहिए और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की जरूरत है। अपने भाषण के दौरान खरगे ने विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि सिलेबस में ऐसे विचार शामिल किए जा रहे हैं, जिनमें शूद्रों के वेद सुनने या उनका उच्चारण करने पर कठोर दंड का उल्लेख है। उन्होंने ऐसे विचारों की निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की सामग्री को पाठ्यक्रम से हटाया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह “आरएसएस का सिलेबस” है। उनके इस बयान के बाद भाजपा सांसदों ने कड़ा विरोध जताया और सदन में शोर-शराबा शुरू हो गया। हंगामे के बीच राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा ने खरगे के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता ने जो बातें कही हैं, यदि वे सही हैं तो उन्हें मनुस्मृति के मूल पाठ के आधार पर सदन में प्रमाणित करना चाहिए। नड्डा ने कहा कि बिना प्रमाण ऐसे आरोप लगाना उचित नहीं है और इससे समाज में भ्रम की स्थिति पैदा होती है। उन्होंने भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी को इस विषय पर अपनी बात रखने का अवसर देने की भी मांग की।
इसके बाद भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी और कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी के बीच भी तीखी बहस हुई। त्रिवेदी ने मनुस्मृति के मूल ग्रंथ का हवाला देने की बात कही, जबकि प्रमोद तिवारी ने एक प्रकाशित पुस्तक दिखाते हुए कहा कि यह वर्तमान में बाजार में उपलब्ध है। इस पर सत्ता पक्ष ने मूल और प्रामाणिक संस्करण पेश करने की मांग दोहराई। विवाद बढ़ने पर सभापति ने हस्तक्षेप करते हुए खरगे की मनुस्मृति संबंधी टिप्पणी को सदन की कार्यवाही से हटाने का निर्देश दिया। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने विपक्ष के नेता से माफी मांगने की भी मांग की। हंगामे के कारण कुछ समय तक राज्यसभा की कार्यवाही प्रभावित रही। अपने भाषण में खरगे ने पेपर लीक की घटनाओं को लेकर सरकार को घेरते हुए कहा कि इन घटनाओं से लाखों छात्रों और उनके परिवारों का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि केवल सजा और जुर्माना बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। सरकार को परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाने, जवाबदेही तय करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की जरूरत है। तभी देश के छात्रों का हित हो सकेगा।