प्राइवेट अस्पताल में नव जात की मौत हो गई। वहीं बिना पंजीकरण के संचालित अस्पताल को सीज कर दिया गया है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामे के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
जानकारी के अनुसार बिसंडा थाना क्षेत्र के कैरी गांव निवासी 20 वर्षीय अर्चना पत्नी शैलेश को अचानक प्रसव पीड़ा होने लगी। परिजनो ने उसे पीएचसी बिसंडा में भर्ती कराया। जहां डॉक्टरो ने बच्चा उल्टा होने की बात कह कर उसे जिला महिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। परिजनो ने सरकारी एंबुलेस को फोन करके बुलवाया। मौके पर पहुंची एंबुलेस में परिजनो ने अर्चना को लिटा दिया। एंबुलेस चालक अर्चना को जिला अस्पताल न लाकर उसे बिंसडा स्थित एक प्राइवेट अस्पताल ले गया। यहां पर डॉक्टरो ने प्रसव के नाम पर 16 हजार रूपए ऐंठ लिये। मशक्कत के बाद अर्चना ने नवजात बच्चे को जन्म दिया। जन्म देने के कुछ देर बाद नवजात की अचानक मौत हो गई। मासूम की मौत की खबर मिलते ही परिजनो में आक्रोश पैदा हो गया। डॉक्टर और कर्मचारी इधर उधर चले गए। मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया। अर्चना के ससुर अशोक ने बताया कि शैलेश की शादी पिछले वर्ष हुई थी। आरोप लगाया कि डॉक्टरो ने सुरक्षित प्रसव करवाने और जच्चा बच्चा को कुछ न होने की जिम्मेदारी लिया था। बताया कि बच्चा काफी देर तक फंसा रहा। जोर जबरजस्ती से प्रसव करवाया। लापरवाही के चलते बच्चे की मौत हो गई। सीएमओ डॉक्टर बिजेद्र सिंह ने बताया कि प्राइवेट क्लीनिक बिना पंजीकरण के चल रहा था। मौके पर पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल को सीज कर दिया है। वही स्वास्थ्य विभाग मामले की जांच पड़ताल में जुटा हुआ है।