57वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में कारोबारियों, एमएसएमई और छोटे विक्रेताओं के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई बैठक में जीएसटी अधिकारियों की गिरफ्तारी संबंधी शक्तियों पर अंकुश लगाने और आपराधिक अभियोजन शुरू करने की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने का फैसला लिया गया।
नई व्यवस्था के तहत छोटे और सामान्य कर विवादों में आपराधिक कार्रवाई का दायरा सीमित होगा। साथ ही 10 हजार रुपये या उससे कम की मौद्रिक सीमा वाले नए नोटिस जारी नहीं किए जाएंगे और इस सीमा से कम के लंबित नोटिस वापस लिए जाएंगे। इससे छोटे कारोबारियों पर अनुपालन का बोझ कम होने की उम्मीद है। काउंसिल ने अनरजिस्टर्ड राइडर डिलीवरी सेवाओं पर जीएसटी दर 18 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत करने का फैसला किया है। इसके अलावा छोटे ई-कॉमर्स विक्रेताओं को सुविधा देते हुए प्लेटफॉर्म के वेयरहाउस को कारोबार के स्थान के रूप में पंजीकृत करने की अनुमति देने का निर्णय लिया गया है। इससे करीब 9.5 लाख छोटे विक्रेताओं को लाभ मिलने की बात कही गई है। छोटे कारोबारियों को अनुपालन में राहत
अपराध संबंधी कार्रवाई की सीमा बढ़ाए जाने और छोटे नोटिसों को हटाने से कम राशि वाले कर विवादों में कारोबारियों को राहत मिलने की उम्मीद है। जीएसटी व्यवस्था में प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर भी जोर दिया गया है। ई-कॉमर्स और डिलीवरी क्षेत्र में बदलाव
ई-कॉमर्स विक्रेताओं के लिए वेयरहाउस संबंधी पंजीकरण प्रक्रिया को आसान किया गया है। वहीं अनरजिस्टर्ड राइडर डिलीवरी सेवाओं पर कर दर में कमी से इस क्षेत्र में काम करने वाले कारोबारियों और सेवा प्रदाताओं को राहत मिलेगी।