दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को छह हजार से अधिक मतों के अंतर से हराकर जीत दर्ज की। इस हार को भाजपा के सबसे मजबूत राजनीतिक गढ़ों में से एक दतिया में बड़ा झटका माना जा रहा है। चुनाव परिणाम के साथ ही भाजपा की चुनावी रणनीति, स्थानीय संगठन और पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक पकड़ को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। इस उपचुनाव का सबसे बड़ा राजनीतिक फैसला भाजपा द्वारा प्रत्याशी बदलना माना जा रहा है। पार्टी ने कई बार दतिया से जीत दर्ज कर चुके डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा था। टिकट बदलने के फैसले के बाद स्थानीय स्तर पर असंतोष की स्थिति बनी रही, जिसे दूर करने के लिए भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समेत प्रदेश के कई वरिष्ठ नेताओं ने चुनाव प्रचार किया, संगठन को सक्रिय किया गया और चुनावी रणनीति में भी बदलाव किए गए, लेकिन इन सभी प्रयासों के बावजूद पार्टी सीट बचाने में सफल नहीं हो सकी। दूसरी ओर कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने स्थानीय मुद्दों और संगठन की मजबूती के दम पर चुनाव लड़ा और भाजपा के गढ़ में जीत दर्ज कर राजनीतिक संदेश देने में सफलता हासिल की। दतिया उपचुनाव का यह परिणाम अब भाजपा के लिए आत्ममंथन का विषय बन गया है, जबकि कांग्रेस इसे प्रदेश की राजनीति में अपनी बड़ी जीत और बढ़ते जनाधार के रूप में देख रही है। भाजपा की अंदर खाने नाराजगी के चलते कांग्रेस ने जबरदस्त सेंधमारी की है।