बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने संगठन में बड़ी कार्रवाई करते हुए समधी तथा पार्टी के वरिष्ठ नेता अशोक सिद्धार्थ और राघवेंद्र (रणधीर) बेनीवाल को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। दोनों पर पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। कार्रवाई के बाद मायावती ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दोनों नेताओं के लिए अब बसपा के दरवाजे हमेशा के लिए बंद हो चुके हैं और उनकी पार्टी में वापसी किसी भी स्थिति में संभव नहीं होगी।
मायावती ने कहा कि बसपा एक मिशन आधारित राजनीतिक आंदोलन है, जहां संगठन और अनुशासन सर्वोपरि हैं। पार्टी के सिद्धांतों और विचारधारा के खिलाफ काम करने वाले किसी भी नेता या कार्यकर्ता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संगठन के हितों से ऊपर कोई व्यक्ति नहीं है और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों पर आगे भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
अशोक सिद्धार्थ आकाश आनन्द के ससुर है। लंबे समय तक बसपा के राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे हैं। उन्होंने पार्टी में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और राज्यसभा सदस्य भी रहे। वहीं राघवेंद्र (रणधीर) बेनीवाल भी संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी रहे हैं और विभिन्न राज्यों में पार्टी को मजबूत करने की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। ऐसे दो बड़े नेताओं का एक साथ निष्कासन बसपा के भीतर बड़े संगठनात्मक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए मायावती संगठन में अनुशासन और नेतृत्व की पकड़ मजबूत करना चाहती हैं। हाल के महीनों में बसपा लगातार संगठनात्मक फेरबदल कर रही है और ऐसे नेताओं पर कार्रवाई कर रही है, जिनकी गतिविधियां पार्टी लाइन के विपरीत मानी जा रही हैं। दो वरिष्ठ नेताओं के निष्कासन के बाद उत्तर प्रदेश सहित देश की राजनीति में इस फैसले की चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि मायावती ने इस कार्रवाई के जरिए पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संदेश दिया है कि अनुशासनहीनता और संगठन विरोधी गतिविधियों के लिए बसपा में अब कोई जगह नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि पार्टी से निकाले गए नेताओं की वापसी की कोई संभावना नहीं है।