ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े ठिकानों को लेकर दोनों देशों के बीच गंभीर चिंताएं हैं। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और इस्राइल एक बड़ा कदम उठाने पर विचार कर रहे हैं।
अमेरिका और इस्राइल वर्तमान में चल रहे युद्ध के बीच ईरान के अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के भंडार को सुरक्षित करने के लिए विशेष बलों की संभावित तैनाती पर चर्चा कर रहे हैं। यह जानकारी एक्सियोस (Axios) की एक रिपोर्ट में सामने आई है, जिसमें इस मामले से जुड़े चार सूत्रों का हवाला दिया गया है। यह कदम ईरान के परमाणु संपत्तियों पर बढ़ते फोकस को दर्शाता है, क्योंकि क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। अब परमाणु हथियारों पर किया जा रहा फोकस
रिपोर्ट के अनुसार इस तरह के एक ऑपरेशन को चल रहे युद्ध के बाद के चरण में विचार के लिए रखा जाएगा। जो यह दर्शाता है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े ठिकानों को लेकर दोनों देशों के बीच गंभीर चिंताएं हैं।अमेरिकी मीडिया संस्थान एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार यह ऑपरेशन मौजूदा युद्ध के अगले चरण में किया जा सकता है। जिसका उद्देश्य ईरान के परमाणु संसाधनों को सुरक्षित करना है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गाय है कि ईरान के परमाणु भंडार के खिलाफ यह मिशन तभी शुरू हो पाएगा, जब ईरान की सैन्य क्षमता पूरी तरह से कमजोर हो जाए। परणामु कार्यक्रम पर ट्रंप सख्त
अमेरिका-इस्राइल के इस मिशन का मकसद ईरान के पास मौजूद लगभग 450 किलोग्राम 60 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम को अपने नियंत्रण में लेना बताया जा रहा है। बता दें कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि ईरान को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार 60 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम को बहुत कम समय में 90 प्रतिशत तक संवर्धित किया जा सकता है, जिसे परमाणु हथियार बनाने के लिए आवश्यक स्तर माना जाता है। इसी कारण अमेरिका और इस्राइल इस यूरेनियम भंडार को गंभीर सुरक्षा खतरे के रूप में देख रहे हैं। जमीन पर उतरेगी सेना
एक्सियोस ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि यदि यह मिशन शुरू होता है तो अमेरिकी या इस्राइली सैनिकों को सीधे ईरान की जमीन पर उतरना पड़ सकता है। उन्हें कड़ी सुरक्षा वाले भूमिगत परमाणु ठिकानों तक पहुंचकर वहां मौजूद यूरेनियम को अपने नियंत्रण में लेना होगा। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस ऑपरेशन को अमेरिका अकेले अंजाम देगा, इस्राइल करेगा या फिर दोनों देश मिलकर इसे पूरा करेंगे। रणनीति को लेकर ईरान भी बेहद एलर्ट है।