किसी भी व्यक्ति के साथ उसके पेशे,सामाजिक स्थिति अथवा स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर अपमानजनक या भेदभावपूर्ण व्यवहार नहीं किया जाना चाहिये। उपरोक्त उद्गगार डीआईजी ने आयोजित कार्यशाला के दौरान व्यक्त किये।
राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के अन्तर्गत पुलिस अधिकारियों/कार्मिकों हेतु एचआईवी-एड्स के सम्बन्ध में कलेक्ट्रेट सभागार में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में डीआईजी उपस्थित रहे।
कार्यशाला में एचआईवी-एड्स से जुड़े विषयों यथा रोकथाम, जाँच,उपचार एवं भेदभाव मुक्त वातावरण के बारे में पुलिस अधिकारियों एवं कार्मिकों को संवेदीकृत किया गया। कार्यशाला का प्रारम्भ मुख्य चिकित्सा अधिकारी बाँदा डा० विजेन्द्र सिंह के द्वारा किया गया। उन्होंने कार्यशाला में उपस्थित पुलिस अधिकारियों का स्वागत करते हुए बताया कि एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों में प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण अन्य बीमारियों से ग्रसित होने की सम्भावना बनी रहती है। जिसका उपचार विभिन्न सरकारी एवं गैरसरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों में कार्यरत चिकित्सा कर्मियों द्वारा किया जाता है। उन्होंने बताया कि एचआईवी एक्ट के प्रावधानों में एचआईवी ग्रसित लोगों को समान संरक्षा सुरक्षा एवं अधिकार प्राप्त हैं। इस एक्ट का उद्देश्य एचआईवी एवं एड्स से लोगों का बचाव एवं इसके विस्तार को रोकना है। कार्यशाला में आमन्त्रित अनुराग तिवारी सहायक लीगल एड डिफेंस काउंसिल द्वारा एचआईवी-एड्स (निवारण एवं नियन्त्रण) अधिनियम 2017 के प्रावधानों के विषय में विस्तार से बताया गया। उन्होंने इस एक्ट के अन्तर्गत एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों को बिना भेद-भाव के आवश्यक उपचार,देखभाल एवं अन्य सेवाएं प्रदान करने एवं इससे जुड़ी शिकायतों के निवारण हेतु प्रावधानों के विषय में बताया।कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए जिला एड्स नियन्त्रण अधिकारी डा० अजय कुमार ने पीपीटी के माध्यम से एड्स के सम्बन्ध में जानकारी, इससे जुड़ी भ्रान्तियों एवं रोकथाम व उपचार के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इस एक्ट के अन्तर्गत पुलिस के व्यवहार को अधिक संवेदनशील और सहयोगात्मक बनाने पर विशेष बल दिया गया है।मुख्य अतिथि पुलिस उपमहानिरीक्षक राजेश एस ने मण्डल के चारों जनपदों के पुलिस अधिकारियों को इस बीमारी से जुड़े व्यक्तियों के साथ गरिमापूर्ण,संवेदनशील एवं सम्मानजनक व्यवहार किये जाने पर जोर दिया। डीआईजी ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के साथ उसके पेशे,सामाजिक स्थिति अथवा स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर अपमानजनक या भेदभावपूर्ण व्यवहार नहीं किया जाना चाहिये। उन्होंने यह भी कहा कि कानून प्रवर्तन की कार्यवाही के दौरान किसी भी व्यक्ति के मानवाधिकारों का उल्लंघन न हो। कार्यशाला के अन्त में जिला कार्यक्रम प्रबन्धक बृजेन्द्र कुमार साहू ने कहा कि पुलिस कर्मियों को एचआईवी संक्रमण,रोकथाम के उपायों तथा इससे जुड़ी भ्रान्तियों के सम्बन्ध में वैज्ञानिक एवं प्रमाणित जानकारी प्रदान की जानी चाहिये जिससे वे स्वयं भी सुरक्षित रह सकें तथा समाज में जागरूकता फैलाने में सहयोग कर सकें।