कानपुर-किडनी के बाद लिवर ट्रांसप्लांट का सामने आया राज

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किडनी के बाद अब लीवर ट्रांसप्लांट का मामला सामने आया है। जिससे अब जांच का दायरा और भी बढ़ गया है।
कानपुर में किडनी ट्रांसप्लांट के आरोपियों के तार लिवर ट्रांसप्लांट करने के आरोपियों से जुड़ रहे हैं। पुलिस को शिवम अग्रवाल के मोबाइल पर टेलीग्राम के तीन ग्रुप मिले हैं, जिनमें से एक ग्रुप लिवर पार्ट डोनर नाम से है। ग्रुप में शिवम अग्रवाल, अली, डॉ. रोहित समेत अन्य लोग जुड़े हुए हैं। पुलिस ने इस पर अलग से जांच शुरू कर दी है। पश्चिम जोन के साइबर सेल का सहयोग लिया जा रहा है। डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि जेल गए शिवम अग्रवाल से मंगलवार को जांच अधिकारी ने लिवर ट्रांसप्लांट ग्रुप के बारे में जानकारी की थी लेकिन उसने गोलमोल जवाब दिए थे। उसके मोबाइल में टेलीग्राम के तीन ग्रुप मिले थे, जिसमें किडनी डोनर, किडनी एजेंट्स, लिवर पार्ट डोनर शामिल हैं।
ग्रुप में अली से ही आयुष का संपर्क हुआ
किडनी डोनर ग्रुप में शिवम और आयुष भी जुड़े हुए थे। तीनों ग्रुप के एडमिन अगर किसी से बातचीत करनी या उनको कोई निर्देश देना होता था तो उसको डायरेक्ट मैसेज (डीएम) लिखकर भेजते थे। फिर उनके बीच संवाद शुरू हो जाता था। ग्रुप में अली से ही आयुष का संपर्क हुआ और अली ने मेरठ वाली टीम से मुलाकात कराई थी। टेलीग्राम के लिवर पार्ट डोनर ग्रुप में भी कई सदस्य हैं।
कोड वर्ड के साथ मिले मैसेज
उनकी जानकारी जुटाई जा रही है। कुछ लोगों ने अपने आप को अलग कर लिया है। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक कुछ लोग लिवर ट्रांसप्लांट के लिए अन्य लोगों से बातचीत कर रहे हैं। कुछ मैसेज और कोड वर्ड भी मिला है। किडनी वाले ग्रुप में 643 सदस्य, किडनी एजेंट वाले ग्रुप में 514 और लिवर वाले ग्रुप में 710 सदस्य हैं। पुलिस सभी ग्रुपों की जानकारी जुटा रही है।
चार नंबरों से होती थी डॉ रोहित की बातचीत
पुलिस अधिकारियों को डॉ. रोहित के चार मोबाइल नंबरों की जानकारी हुई है, जिनकी मदद से वह अलग-अलग लोगों से बातचीत करता था। तीन मोबाइल नंबरों से सिर्फ व्हाट्सएप कॉलिंग करता था, जबकि एक नंबर अपनी गर्लफ्रेंड से बतियाने के लिए रखे हुए था। पुलिस की टीम उसकी गर्लफ्रेंड की तलाश में जुट गई है।
UP TIMES NEWS
Author: UP TIMES NEWS

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