भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की शाखा में करीब 50 लाख रुपये के सोने-चांदी के आभूषणों वाला लॉकर खाली मिलने से हड़कंप मच गया। पति की मौत के बाद लखनऊ में रह रही महिला करीब चार माह बाद बैंक पहुंची तो कर्मचारियों ने पहले उसके नाम लॉकर होने से ही इनकार कर दिया। दस्तावेज दिखाने के बाद रिकॉर्ड में लॉकर मिला। 27 जुलाई को चाबी से लॉकर खोला गया तो उसमें रखे करीब 50 लाख रुपये के आभूषण गायब थे। मामले में पुलिस ने शाखा प्रबंधक और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ अमानत में खयानत की धारा में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कानपुर के कौशलपुरी निवासी रश्मि अरोड़ा ने 26 फरवरी 2003 को स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर की स्वरूपनगर शाखा में बचत खाता खुलवाया था। इसी दौरान उन्हें लॉकर नंबर 23 आवंटित हुआ था। रश्मि के मुताबिक, उन्होंने लॉकर में करीब 50 लाख रुपये कीमत के पुश्तैनी सोने-चांदी के आभूषण रखे थे। पति सुनील अरोड़ा के निधन के बाद वह लखनऊ में अपनी बेटी के साथ रहने लगीं। दूरी अधिक होने के कारण बैंक आना-जाना कम हो गया। करीब चार माह पहले जब रश्मि अपनी बेटी के साथ बैंक पहुंचीं तो उन्हें बताया गया कि स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर का एसबीआई में विलय हो चुका है और उनके नाम कोई लॉकर नहीं है। इसके बाद उन्होंने बैंक के पुराने दस्तावेज दिखाए। रिकॉर्ड की जांच में लॉकर की जानकारी सामने आई। बैंक ने बताया कि लॉकर का किराया उनके खाते से कट रहा था।
21 जुलाई को खाते में जमा किए रुपये
रश्मि ने 21 जुलाई को खाते में रुपये जमा कराए। इसके बाद लॉकर से संबंधित जानकारी मिली, लेकिन उस समय उनके पास चाबी नहीं थी। 27 जुलाई को वह चाबी लेकर बैंक पहुंचीं और दोपहर करीब 3:15 बजे लॉकर खुलवाया। लॉकर के अंदर कोई गहना नहीं था। लाखों रुपये के आभूषण गायब देखकर वह स्तब्ध रह गईं। पुलिस ने शुरू की जांच
रश्मि ने बैंक प्रबंधन और कर्मचारियों पर मिलीभगत कर गहने हड़पने का आरोप लगाते हुए पुलिस से शिकायत की। पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर स्वरूपनगर थाने में शाखा प्रबंधक और अज्ञात कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस बैंक के लॉकर रिकॉर्ड, संबंधित दस्तावेज, एक्सेस रजिस्टर और सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।