झारखंड में JSSC-CGL परीक्षा रद्द किए जाने के बाद अब पहले से चयनित अभ्यर्थियों का आक्रोश सामने आया है। नौकरी गंवाने की आशंका से परेशान अभ्यर्थियों ने सरकार के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया और अपनी नियुक्तियां बरकरार रखने की मांग की। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है तो दोषियों पर कार्रवाई की जाए, लेकिन ईमानदारी से चयनित उम्मीदवारों को सजा न दी जाए।
रांची में चयनित JSSC-CGL अभ्यर्थियों ने झारखंड सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया। अभ्यर्थियों ने कहा कि उन्होंने परीक्षा पास करने के बाद विधिवत नियुक्ति प्राप्त की है और कई लोग करीब सात महीने से सरकारी सेवा में काम कर रहे हैं। परीक्षा रद्द होने के फैसले से करीब 2,000 चयनित अभ्यर्थियों के सामने नौकरी पर संकट खड़ा हो गया है। सरकार के फैसले के खिलाफ सड़क पर उतरे चयनित कर्मचारी
चयनित अभ्यर्थियों ने कहा कि उन्हें भर्ती में किसी गड़बड़ी का दोषी नहीं माना जा सकता। उनका कहना है कि यदि सरकार और जांच एजेंसियां चाहें तो सभी चयनित अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच कर सकती हैं। अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री से फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की। कई अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने दूसरी नौकरियां छोड़कर JSSC-CGL के माध्यम से मिली नौकरी ज्वाइन की थी। ऐसे में नियुक्ति रद्द होने से उनके सामने रोजगार का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। कुछ अभ्यर्थियों ने कहा कि वे अपने हक के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। 22 भर्ती परीक्षाएं रद्द, जांच के आदेश
झारखंड सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के बीच JSSC-CGL समेत कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया है। सरकार ने पुरानी परीक्षाओं की भी जांच कराने की बात कही है। इस फैसले के बाद एक ओर परीक्षा रद्द किए जाने की मांग कर रहे अभ्यर्थियों में राहत की स्थिति है, वहीं दूसरी ओर पहले से नियुक्त उम्मीदवार अपनी नौकरी बचाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं।
चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, लेकिन बिना दोष साबित हुए सभी चयनित उम्मीदवारों की नियुक्तियां समाप्त करना उचित नहीं है। अभ्यर्थियों ने न्यायिक लड़ाई लड़ने की बात कही है। उन्होंने कहा कि उनके साथ अन्याय हुआ है। इसके लिए वह आरपार की लड़ाई लड़ेंगे।