झांसी-नौकरी के नाम पर ठगी का भंडाफोड़, आठ जालसाज गिरफ्तार

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नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं को ठगी के जाल में फंसाने वाले गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। छापेमारी के दौरान पुलिस ने आठ जालसाजों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि वहां ट्रेनिंग के नाम पर रखे गए 50 युवक-युवतियों को मुक्त कराया गया। गिरोह के सरगना समेत तीन आरोपी मौके से फरार हो गए।
झांसी के प्रेमनगर थाना क्षेत्र के बिजौली स्थित कृष्णा कॉम्प्लेक्स में संचालित एमएस मां लक्ष्मी एसोसिएट के कार्यालय में साइबर पुलिस, बरुआसागर और बबीना पुलिस की संयुक्त टीम ने दबिश दी। पुलिस ने मौके से फर्जी कंपनी और चिटफंड से जुड़े छह रजिस्टर, पांच कॉपियां, छह डायरी, नौ प्रमाणपत्र, आवेदन फॉर्म की नौ जिल्द, कैशबुक और 20 रुपये के 52 स्टांप पेपर बरामद किए। पुलिस ने मौके से प्रयागराज के कर्नलगंज निवासी आलोक कुमार (21) तथा राजस्थान के टोंक निवासी रामसिंह मीणा (24), लखन मेहता (19), बब्बू (23), आलोक कुमार (33), मोहित वर्मा (19), सुरेंद्र और नितेश (23) को गिरफ्तार किया। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
तीन महीने से चल रहा था ठगी का खेल
पुलिस के मुताबिक गिरोह करीब तीन महीने से सक्रिय था। कुछ दिन पहले तीन युवकों ने साइबर थाने पहुंचकर गिरोह की गतिविधियों की जानकारी दी थी। इसके बाद एसएसपी विकास कुमार ने संयुक्त टीम गठित कर कार्रवाई के निर्देश दिए। दो दिन तक सुराग जुटाने के बाद टीम ने कार्यालय पर छापा मारा। कार्रवाई के दौरान वहां मौजूद लोगों में अफरातफरी मच गई। इसी दौरान गिरोह के कुछ सदस्य भागने में सफल रहे। पुलिस अब फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है।
1100 रुपये लेकर दिखाते थे सरकारी नौकरी का सपना
एसएसपी विकास कुमार के अनुसार आरोपी युवाओं को अलग-अलग विभागों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर बुलाते थे। शुरुआत में एंट्री फॉर्म के नाम पर प्रत्येक युवक से 1100 रुपये लिए जाते थे। इसके बाद ट्रेनिंग और अन्य मदों के नाम पर भी रकम वसूली जाती थी। युवाओं को भरोसा दिलाया जाता था कि ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उन्हें सरकारी नौकरी मिल जाएगी। आरोप है कि बाद में उन्हें नेटवर्क मार्केटिंग के उत्पाद बेचने और अपने रिश्तेदारों व परिचितों को नेटवर्क से जोड़ने के लिए लगाया जाता था।
तीन मंजिला इमारत में चल रहा था पूरा खेल
पुलिस के अनुसार जालसाजों ने तीन मंजिला इमारत किराये पर ले रखी थी। अलग-अलग मंजिलों पर युवक-युवतियों को रखा जाता था। एक कमरे में चार से पांच लोगों के रहने की व्यवस्था थी। उन्हें बाहर की दुनिया से अलग रखकर ट्रेनिंग और नेटवर्क मार्केटिंग के तौर-तरीके बताए जाते थे। रोज करीब एक घंटे की ‘सक्सेस बिल्डिंग प्रोग्राम’ की क्लास भी चलती थी। इसमें युवाओं को जल्द सफलता और लग्जरी जिंदगी के सपने दिखाकर नेटवर्क से जोड़ने का प्रयास किया जाता था।
वाराणसी और लखनऊ तक जुड़े गिरोह के तार
पुलिस को जांच में गिरोह के तार वाराणसी और लखनऊ में पकड़े गए जालसाजों से जुड़े होने की जानकारी मिली है। वाराणसी में पकड़ी गई महादेव इंटरप्राइजेज से संबंधों की भी जांच की जा रही है। पुलिस के अनुसार कार्रवाई के बाद गिरोह ने झांसी को नया ठिकाना बनाया था और यहां से मध्य प्रदेश समेत दूसरे राज्यों में नेटवर्क फैलाने की तैयारी की जा रही थी।
साइबर सीओ ने युवाओं को किया सतर्क
सीओ साइबर आसमा वकार ने युवाओं से नौकरी के नाम पर किसी भी तरह की रकम मांगने वालों से सावधान रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि रजिस्ट्रेशन, सदस्यता, ट्रेनिंग या सिक्योरिटी के नाम पर पहले पैसे मांगे जाएं तो इसकी पूरी जांच करनी चाहिए। कंपनी की वैधता, पंजीकरण और नियुक्ति प्रक्रिया की स्वतंत्र रूप से पड़ताल करने के बाद ही कोई कदम उठाएं।
UP TIMES NEWS
Author: UP TIMES NEWS

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