समाजवादी पार्टी के गाजीपुर सांसद अफजाल अंसारी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। शस्त्र लाइसेंस से जुड़ी अनियमितताओं के मामले में उनके खिलाफ दूसरी एफआईआर दर्ज की गई है। इस बार उन पर शस्त्रों के संभावित दुरुपयोग और असलहों की खरीद-बिक्री से संबंधित सरकारी पत्रावलियां अभिलेखागार से गायब कराने का आरोप लगाया गया है।
पुलिस के अनुसार, मुख्तार अंसारी गिरोह से जुड़े शस्त्र लाइसेंसों की जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण अभिलेख नहीं मिले। जांच में यह भी आशंका जताई गई कि पत्रावलियां गायब होने के कारण संबंधित हथियारों का सत्यापन प्रभावित हुआ, जिससे उनके दुरुपयोग की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। इससे पहले भी असलहों की खरीद-बिक्री से जुड़ी पत्रावली गायब कराने के आरोप में अफजाल अंसारी समेत तत्कालीन शस्त्र लिपिकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा चुका है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान मिले नए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। उधर, सांसद अफजाल अंसारी ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित कार्रवाई बताया है। उनका कहना है कि संबंधित शस्त्र लाइसेंस वर्ष 1983 का है और उस पर खरीदा गया हथियार अब भी उनके कब्जे में है। उन्होंने दावा किया कि लाइसेंस का समय-समय पर नियमानुसार नवीनीकरण कराया गया है तथा वह जांच में पूरा सहयोग करेंगे। पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।