कांग्रेस ने 2 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए अजय राय को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया था। उनकी जगह रामपुर खास की विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपी गई। अब पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की वजहों को लेकर सामने आई जानकारी में प्रदेश संगठन में मतभेद और प्रदेश प्रभारी की रिपोर्ट को अहम आधार बताया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और अजय राय के बीच संगठन की कार्यप्रणाली को लेकर मतभेद लगातार बढ़ रहे थे। जिलाध्यक्षों की नियुक्ति, संगठन के विस्तार और आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति समेत कई मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पा रही थी। प्रदेश प्रभारी की रिपोर्ट से बढ़ी बदलाव की चर्चा
पार्टी सूत्रों के अनुसार प्रदेश संगठन को लेकर प्रदेश प्रभारी की ओर से कांग्रेस नेतृत्व को रिपोर्ट दी गई थी। इसमें संगठन की स्थिति, नेताओं के बीच समन्वय और चुनावी तैयारियों से जुड़े मुद्दों का उल्लेख था। इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष बदलने को लेकर पार्टी नेतृत्व में मंथन तेज हुआ। अजय राय और प्रदेश प्रभारी के बीच मतभेद का असर संगठनात्मक फैसलों पर भी दिखाई देने की चर्चा रही। पार्टी के भीतर यह भी माना गया कि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व प्रदेश संगठन में नई टीम के साथ आगे बढ़ना चाहता है। नई टीम से सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश
आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के साथ कांग्रेस ने संगठन में कई अन्य महत्वपूर्ण बदलाव भी किए हैं। सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा देवेंद्र निषाद और आलोक प्रसाद को उपाध्यक्ष बनाया गया है। नई नियुक्तियों के जरिए कांग्रेस ने अलग-अलग सामाजिक वर्गों और क्षेत्रों को संगठन में प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है। पार्टी के सामने अब नई टीम के साथ संगठन को सक्रिय करने और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को गति देने की चुनौती है। अजय राय की आगे की भूमिका
प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद अजय राय ने पार्टी नेतृत्व के फैसले को स्वीकार किया है। उनके लिए कांग्रेस संगठन में आगे कोई नई जिम्मेदारी तय किए जाने की चर्चा भी है। 2027 के चुनाव पर नजर
प्रदेश संगठन में बदलाव को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। नई टीम के सामने कार्यकर्ताओं को एकजुट करने, संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने और गठबंधन की रणनीति को प्रभावी बनाने की चुनौती होगी।