मकान और जमीन के विवाद में रिश्तों का खौफनाक अंत हो गया। छोटे भाई ने अपने बेटे और दो साथियों के साथ मिलकर बड़े भाई का अपहरण कर लिया। संपत्ति अपने नाम करने के लिए दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने का दबाव बनाया गया। इनकार करने पर गला घोंटकर हत्या कर दी और शव बोरे में बंद कर बांध में फेंक दिया।
जनपद चित्रकूट के भरतकूप थाना क्षेत्र के बैहार गांव निवासी ई-रिक्शा चालक मनोज पाल (50) का 19 अगस्त को अपहरण कर लिया गया था। मनोज की पत्नी पट्टू देवी ने 20 अगस्त को पुलिस को सूचना दी थी कि पति ई-रिक्शा चलाने के लिए घर से निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। उनका ई-रिक्शा चौहान ढाबे के पास मिला था। आसपास के लोगों ने बताया कि शाम करीब साढ़े सात बजे कार सवार लोग मनोज को जबरन कार में बैठाकर ले गए थे।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए ढाबे और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। कार के नंबर के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची। जांच में सामने आया कि अपहरण में मनोज का छोटा भाई अनिल पाल, उसका बेटा हिमांशु पाल और उनके साथी रोहित साहू व राजू पाल शामिल थे। पुलिस ने चारों को गिरफ्तार कर लिया। घटना में प्रयुक्त कार भी बरामद कर ली गई है।
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि मनोज के नाम दर्ज मकान और जमीन को अपने नाम कराने के लिए उस पर दबाव बनाया गया था। पहले ढाबे के पास उसे पीटकर कार में बैठाया गया और महोबा होते हुए झांसी ले जाया गया। वहां भी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाया गया, लेकिन मनोज ने इनकार कर दिया। इसके बाद आरोप है कि भतीजे हिमांशु ने उसका गला घोंट दिया। हत्या के बाद शव को बोरे में बंद कर लहचूरा बांध में फेंक दिया गया। पिता की वरासत से शुरू हुआ संपत्ति विवाद
पुलिस जांच में सामने आया कि मनोज के पिता देवी चरन के पास तीन मकान थे। एक मकान मनोज और दूसरा अनिल के नाम किया गया था। इसके अलावा बांदा जिले के जसपुरा थाना क्षेत्र के गौरी कलां में करीब सात बीघा पैतृक जमीन थी। पिता ने मृत्यु से पहले इसकी वरासत मनोज के नाम कर दी थी। इसी को लेकर अनिल अपने भाई से खुन्नस रखने लगा था और जमीन-मकान अपने नाम कराने का दबाव बना रहा था। मामले को लेकर परिवार में कई बार पंचायत भी हो चुकी थी। बांध में शव की तलाश जारी
आरोपियों के बयान के आधार पर पुलिस ने लहचूरा बांध में शव की तलाश शुरू कर दी है। गोताखोरों की मदद ली जा रही है, लेकिन खबर लिखे जाने तक मनोज का शव बरामद नहीं हो सका था। पुलिस अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि 19 अगस्त को अपहरण के बाद 20 अगस्त तक मनोज को कहां रखा गया था।