राज्यसभा में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल 2026 को मंजूरी मिल गई है। जिसमें शीर्ष पदों पर आईपीएस अफसरों के लिए बड़ा कोटा तय किया गया है। विपक्ष ने बिल को लेकर सदन से वॉकआउट कर दिया।
बुधवार को संसद में सियासी घमासान देखने को मिला। दरअसल, राज्यसभा में ‘केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026’ को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। इसके बाद, विपक्ष ने बिल को आनन-फानन में पास करने का आरोप लगाया है। विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी की और सदन से वॉकआउट भी कर दिया। बिल में होगा यह नियम
अभी तक देश के अलग-अलग अर्धसैनिक बलों के लिए सेवा और प्रशासन के नियम भी अलग-अलग थे। यह बिल उन सभी को हटाकर एक सिंगल सिस्टम लागू करेगा। लेकिन असली पेंच फंसा है आईपीएस अफसरों की तैनाती को लेकर। इस नए कानून के तहत, सीएपीएफ में आईजी रैंक के 50 फीसदी पद और एडीजी रैंक के कम से कम 67 फीसदी पद आईपीएस अधिकारियों के लिए रिजर्व रहेंगे। विपक्ष इस पर सवाल उठा रहा है। पिछले ही साल अक्तूबर में सुप्रीम कोर्ट ने एक रिव्यू पिटीशन खारिज करते हुए कहा था कि अर्धसैनिक बलों में आईपीएस अफसरों की संख्या धीरे-धीरे कम की जाए, जिससे वहां बरसों से काम कर रहे कैडर अधिकारियों को प्रमोशन मिल सके। अब विपक्ष इसी का हवाला देते हुए इस बिल का विरोध कर रहा है। सदन में हुई तीखी नोकझोंक
सदन में बहस का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने साफ कहा कि यह बिल देश के संघीय ढांचे को कमजोर नहीं, बल्कि मजबूत करता है। इससे भर्ती प्रक्रिया बेहतर होगी और जवानों का मनोबल बढ़ेगा। दूसरी ओर, विपक्ष ने मांग की कि इस बिल को संसद की प्रवर समिति के पास भेजा जाए। जब सरकार ने यह मांग नहीं मानी, तो नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अगुवाई में समूचा विपक्ष नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर चला गया।