शिक्षामित्रों को स्पेशल टीईटी 2026 में शामिल करने की मांग को लेकर दाखिल याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने गुरुवार को मामले में फैसला सुनाया।
मामले में वसीम अहमद समेत 220 अन्य शिक्षामित्रों ने याचिका दाखिल की थी। याचिका में परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षामित्रों को विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा में आवेदन का अवसर देने की मांग की गई थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 24 सितंबर को अदालत ने फैसला सुरक्षित कर लिया था।
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई थी कि शिक्षामित्र लंबे समय से परिषदीय विद्यालयों में शिक्षण कार्य कर रहे हैं और उन्हें विभिन्न विभागीय एवं निर्वाचन संबंधी कार्यों का भी अनुभव है। उनका तर्क था कि शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता के बाद भविष्य में शिक्षण कार्य जारी रखने के लिए विशेष टीईटी में उन्हें भी अवसर मिलना चाहिए।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता केवल इस आधार पर स्पेशल टीईटी में शामिल होने का दावा नहीं कर सकते कि वे सामान्य टीईटी में बैठने के लिए पात्र हैं। कोर्ट ने शिक्षामित्रों की कानूनी स्थिति को विशेष परीक्षा के लिए पात्र कार्यरत शिक्षकों से अलग माना। स्पेशल टीईटी को लेकर क्या था मामला
स्पेशल टीईटी को उन कार्यरत शिक्षकों के लिए एक विशेष व्यवस्था के रूप में लागू किया गया है, जिन्हें सेवा में आने के बाद टीईटी की आवश्यकता लागू हुई। अदालत ने कहा कि शिक्षामित्रों की अलग कानूनी स्थिति होने के कारण उन्हें इस विशेष परीक्षा में शामिल करने का स्वतः अधिकार नहीं बनता। याचिका में शिक्षामित्रों ने रखी थी मांग
याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया था कि लंबे समय से शिक्षण कार्य करने और प्रशिक्षण प्राप्त करने के बावजूद उन्हें स्पेशल टीईटी से बाहर रखा गया है। अदालत के फैसले के बाद 2026 की विशेष टीईटी में शिक्षामित्रों को शामिल करने की उनकी मांग स्वीकार नहीं की गई।