महिला कैदी को मृत्युदंड देने की व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में है। अदालत से मौत की सजा मिलने के बाद अब संबंधित जेल और आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
मथुरा। मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी को मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद मथुरा जिला कारागार चर्चा में है। यहां महिला कैदियों को फांसी देने के लिए विशेष फांसीघर मौजूद है। जेल प्रशासन के अनुसार, कानूनी प्रक्रिया पूरी होने और सजा पर अमल का रास्ता साफ होने की स्थिति में मुस्कान को मथुरा जेल लाया जा सकता है। हालांकि, अभी फांसी की तारीख तय नहीं हुई है। सत्र न्यायालय के मृत्युदंड के फैसले की उच्च न्यायालय से पुष्टि और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं जरूरी हैं। ब्रिटिश काल में बनाया गया था महिला फांसीघर
मथुरा जिला कारागार में महिला कैदियों को फांसी देने के लिए विशेष व्यवस्था ब्रिटिश शासनकाल में बनाई गई थी। यह उत्तर प्रदेश का एकमात्र महिला फांसीघर बताया जाता है। आजादी के बाद से यहां किसी महिला कैदी को फांसी नहीं दी गई है। महिला कैदियों को मृत्युदंड दिए जाने के चर्चित मामलों में इस जेल का नाम पहले भी सामने आता रहा है। शबनम और रामश्री के मामले भी रहे चर्चा में
इससे पहले अमरोहा के बावनखेड़ी हत्याकांड में दोषी शबनम को भी मृत्युदंड सुनाया गया था। वहीं, वर्ष 1998 में रामश्री की फांसी की तैयारी के बाद राष्ट्रपति ने उसकी दया याचिका स्वीकार कर सजा को उम्रकैद में बदल दिया था। इन मामलों के कारण मथुरा जेल का महिला फांसीघर लंबे समय से चर्चा में रहा है।