बाँदा-गैंगस्टर एक्ट में दो दोषी करार, पांच-पांच साल की सजा

SHARE:

अपराध के जरिए आर्थिक एवं भौतिक लाभ अर्जित करने और क्षेत्र में भय का माहौल पैदा करने के मामले में गैंगस्टर एक्ट के तहत अदालत ने दो अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए पांच-पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दोनों पर छह-छह हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।

जनपद के बदौसा थाना क्षेत्र में 25 जून 2015 को भुल्ली उर्फ शिवशरण यादव पुत्र रामआसरे और उसके पुत्र लाला यादव पुत्र भुल्ली उर्फ शिवशरण यादव निवासी बरगदहा पुरवा मजरा उतरवा के खिलाफ मु0अ0सं0 74/2015 के तहत धारा 2/3 उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 में मुकदमा दर्ज किया गया था। अभियोजन के अनुसार भुल्ली उर्फ शिवशरण यादव गिरोह का लीडर था, जबकि लाला यादव सक्रिय सदस्य के रूप में अपराधों में शामिल था। अभियोजन के मुताबिक दोनों आरोपी गिरोह के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर अवैध गतिविधियों को अंजाम देते थे और आर्थिक एवं भौतिक लाभ के लिए अपराध करने के अभ्यस्त थे। उनकी गतिविधियों से क्षेत्र में भय और आतंक का वातावरण बना हुआ था तथा आमजन और सरकारी कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना व्याप्त थी। मामले में अभियुक्तों के आपराधिक इतिहास और आधारभूत मुकदमों के आधार पर गैंगचार्ट तैयार कर सक्षम प्राधिकारी से अनुमोदित कराया गया। विवेचना के दौरान एफआईआर, तहरीर, गैंगचार्ट, अभियोजन स्वीकृति समेत अन्य महत्वपूर्ण अभिलेखीय साक्ष्य संकलित किए गए। विवेचना पूरी होने के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया।
पांच गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य बने आधार
न्यायालय ने 11 नवंबर 2016 को दोनों अभियुक्तों के खिलाफ आरोप निर्धारित किए। अभियोजन की ओर से कुल पांच मौखिक गवाहों को परीक्षित कराया गया। इनमें एफआईआर लेखक, वादी मुकदमा, उपनिरीक्षक और तथ्य साक्षी शामिल रहे। इसके अलावा गैंगचार्ट, प्रथम सूचना रिपोर्ट, तहरीर, आरोपपत्र और अभियोजन स्वीकृति सहित अन्य दस्तावेजी साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर विधिवत सिद्ध कराए गए।
विशेष लोक अभियोजक गैंगस्टर एक्ट सौरभ सिंह ने अभियोजन की ओर से प्रभावी पैरवी करते हुए न्यायालय में तर्क रखा कि मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों से दोनों अभियुक्तों की गैंगस्टर एक्ट के तहत आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता प्रमाणित होती है। अभियोजन ने यह भी बताया कि आरोपी गिरोह बनाकर अपराधों के माध्यम से आर्थिक एवं भौतिक लाभ अर्जित करने तथा क्षेत्र में भय का वातावरण उत्पन्न करने में संलिप्त थे।अभियोजन की प्रभावी पैरवी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट)/अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश बांदा श्रीपाल सिंह ने दोनों अभियुक्तों को दोषी करार दिया।
अदालत ने भुल्ली उर्फ शिवशरण यादव और लाला यादव को धारा 3 उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 के तहत पांच-पांच वर्ष के कठोर कारावास और छह-छह हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड जमा नहीं करने पर दोनों को तीन-तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। मुकदमे में पैरोकार पुष्पेंद्र कुमार, कोर्ट मुहर्रिर रघुनाथ मौर्य और विशेष लोक अभियोजक गैंगस्टर एक्ट सौरभ सिंह ने प्रभावी पैरवी की। अभियोजन के अनुसार समयबद्ध तरीके से साक्षियों के बयान कराए गए और उपलब्ध मौखिक एवं अभिलेखीय साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया, जिसके परिणामस्वरूप दोनों अभियुक्तों के खिलाफ आरोप सिद्ध हुए और अदालत ने उन्हें सजा सुनाई।
UP TIMES NEWS
Author: UP TIMES NEWS

Leave a Comment