हाई-प्रोफाइल लूट की घटना की जांच के दौरान संदिग्धों से पूछताछ को लेकर पुलिस और पीड़ित पक्ष के बीच सहमति नहीं बन सकी। मामले में कई बिंदुओं पर सवाल उठने के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है।
कानपुर के सेन पश्चिम पारा क्षेत्र में भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश सचिव रमेश यादव के न्यूरी स्थित फार्म हाउस में सोमवार देर रात दो नकाबपोश बदमाशों ने उन्हें बंधक बनाकर लूटपाट की थी। बदमाश करीब 34 लाख रुपये का माल लेकर फरार हो गए थे। घटना के खुलासे के लिए पुलिस फार्म हाउस और ईंट-भट्ठे पर काम करने वाले कर्मचारियों के साथ कुछ ग्रामीणों से पूछताछ करना चाहती थी, लेकिन रमेश यादव ने उन्हें थाने भेजने से इन्कार कर दिया। बाद में उन्होंने अपने सामने फार्म हाउस पर ही पूछताछ कराने की बात कही। लूट की घटना को लेकर पुलिस को कई बिंदुओं पर संदेह
पुलिस की शुरुआती जांच में कई सवाल सामने आए हैं। जिस स्थान से बदमाशों के फार्म हाउस में प्रवेश करने की आशंका है, वहां लगा सीसीटीवी कैमरा खराब मिला। पुलिस को आशंका है कि बदमाश परिसर की व्यवस्था से परिचित हो सकते हैं। वारदात के दिन फार्म हाउस पर करीब 12 लाख रुपये रखे होने की बात भी जांच के दायरे में है। पुलिस का मानना है कि घटना में किसी करीबी की भूमिका की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। वादी और घटना के विवरण में भी सामने आए सवाल
पुलिस के मुताबिक, मामले में प्राथमिकी न्यूरी गांव के प्रधान रामनरेश यादव की तहरीर पर दर्ज की गई। तहरीर में रमेश यादव के हाथ गमछे से बंधे होने और मुंह पर रुमाल व टेप लगे होने का उल्लेख है, जबकि पुलिस कमिश्नर से बातचीत में रमेश ने हाथ और मुंह पर टेप बंधे होने की बात बताई थी। पुलिस इन बिंदुओं की जांच कर रही है। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने कहा कि जांच और पूछताछ पुलिस की प्रक्रिया है तथा इसमें किसी को बाधा नहीं डालनी चाहिए। वहीं, रमेश यादव का कहना है कि वह किसी को बचा नहीं रहे हैं और पुलिस साक्ष्य प्रस्तुत करे, जिसके बाद वह कर्मचारियों को पूछताछ लिए भेज देंगे।