लखनऊ में बैंक अधिकारी मानस बाजपेयी की खौफनाक वारदात ने हर किसी को स्तब्ध कर दिया। उसने पहले अपनी पत्नी दिव्या मिश्रा की गोली मारकर हत्या की और इसके बाद घर पहुंचकर अपनी बहन तूलिका मिश्रा को भी गोली मार दी। दोनों की हत्या के बाद मानस ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। पुलिस की जांच में अब हथियारों की व्यवस्था और घटना से पहले की उसकी गतिविधियों की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।
लखनऊ के गोमतीनगर इलाके में 20 अगस्त को यह सनसनीखेज घटनाक्रम सामने आया। मानस बाजपेयी भारतीय स्टेट बैंक में कार्यरत था, जबकि उसकी पत्नी दिव्या मिश्रा आईसीआईसीआई बैंक में रिलेशनशिप मैनेजर थीं। दोनों के बीच काफी समय से वैवाहिक विवाद चल रहा था और दोनों अलग रह रहे थे। दिव्या ने तलाक के लिए मामला भी दायर किया था। घटना वाले दिन मानस हथियार लेकर दिव्या के बैंक पहुंचा। उसने बैंक के बाहर दिव्या को गोली मार दी। गंभीर हालत में दिव्या को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। बैंक के बाहर हुई वारदात का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। पत्नी की हत्या करने के बाद मानस अपने घर पहुंचा। वहां उसकी बहन तूलिका मिश्रा मौजूद थी। पुलिस के अनुसार मानस ने तूलिका को भी गोली मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके बाद मानस ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। घर में हुई इस घटना की जानकारी बाद में आसपास के लोगों और पुलिस को मिली। तलाक के विवाद की भी जांच
पुलिस की जांच में सामने आया है कि मानस और दिव्या के बीच लंबे समय से वैवाहिक विवाद चल रहा था। दोनों एक साल से अधिक समय से अलग रह रहे थे। दिव्या ने पिछले वर्ष तलाक का मामला दायर किया था। पुलिस अब इसी विवाद को वारदात के संभावित कारणों में शामिल कर जांच कर रही है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक तलाक के मामले में आर्थिक समझौते से जुड़ी बातों की भी जांच की जा रही है। हथियारों की व्यवस्था पर भी उठे सवाल
वारदात में इस्तेमाल हथियारों को लेकर भी पुलिस की जांच जारी है। मानस के पास एक से अधिक हथियार होने की जानकारी सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि उसे ये हथियार कहां से मिले। इसी कड़ी में सीतापुर के एक अधिवक्ता की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि अधिवक्ता ने खुद हथियार उपलब्ध कराए थे या किसी अन्य व्यक्ति से मानस का संपर्क कराया था। इस संबंध में जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।