बीमार पत्नी से मिलने के लिए अंतरिम जमानत की मांग कर रहे आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली। अदालत ने गुजरात हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने राजस्थान के मामले में उनकी सजा के खिलाफ अपील पर आगे सुनवाई के लिए तारीख तय की है।
सुप्रीम कोर्ट में 14 अक्टूबर को न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने आसाराम की याचिका पर सुनवाई की। आसाराम ने गुजरात हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें बीमार पत्नी से मिलने के लिए अंतरिम जमानत देने से इनकार किया गया था। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि आसाराम राजस्थान हाईकोर्ट से मिले 20 दिन के पैरोल पर हैं। इसके बाद उनकी ओर से याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी गई, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। समर्पण के बाद सजा के खिलाफ अपील पर सुनवाई
आसाराम राजस्थान के जोधपुर में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। राजस्थान हाईकोर्ट ने इस साल मई में उनकी दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा बरकरार रखी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पैरोल की अवधि समाप्त होने और समर्पण करने के बाद उनकी अपील पर सुनवाई की जाएगी। इस मामले में अगली सुनवाई 17 नवंबर को निर्धारित की गई है। गुजरात के मामले में भी उम्रकैद की सजा
आसाराम को गुजरात के गांधीनगर में दर्ज एक अलग दुष्कर्म मामले में भी वर्ष 2023 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। इस मामले में उन्होंने बीमार पत्नी से मिलने के लिए अस्थायी राहत मांगी थी, लेकिन गुजरात हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट में इसी फैसले को चुनौती दी गई थी। पैरोल की अवधि 26 अक्टूबर तक
राजस्थान हाईकोर्ट से मिली 20 दिन की पैरोल की अवधि अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में समाप्त हो रही है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि समर्पण के बाद राजस्थान मामले में उनकी अपील पर आगे सुनवाई होगी। अदालत ने निचली अदालत से मुकदमे के डिजिटल और भौतिक रिकॉर्ड भी मंगाने के निर्देश दिए हैं।