नैतिकता का हवाला देते हुए नेपाल के गृह मंत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा कि नैतिकता किसी भी पद से ज्यादा मायने रखती है। इसलिए वह इस्तीफा दे रहे हैं।
नेपाल के गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने बुधवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने यह फैसला नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए और अपने वित्तीय निवेशों (शेयरों) की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए किया है। फेसबुक पर अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए गुरुंग ने कहा कि वह सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और नैतिक मानकों को बनाए रखना चाहते हैं। नेपाली भाषा में किए गए फेसबुक पोस्ट में उन्होंने लिखा, मैं सुदान गुरुंग 2082 चैत्र 13 से गृहमंत्री की जिम्मेदारी पर ईमानदारी से काम कर रहा हूं। पिछले कुछ समय से उनके शेयरों और संपत्ति को लेकर जनता के बीच कई सवाल उठ रहे थे। गुरुंग ने कहा कि उन्होंने नागरिकों की चिंताओं और टिप्पणियों को बहुत गंभीरता से लिया है। उनके अनुसार, किसी भी पद की तुलना में नैतिकता का वजन ज्यादा होता है और जनता का भरोसा ही सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने आज के ‘जेन जेड’ (Gen Z) आंदोलन का भी जिक्र किया। गुरुंग ने कहा कि आज के युवा सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। उनके मुताबिक, नेतृत्व को हमेशा जवाबदेह होना चाहिए। उन्होंने उन 46 लोगों के बलिदान को याद किया जिनके संघर्ष से यह सरकार बनी है। गुरुंग ने कहा कि जब सरकार पर सवाल उठते हैं, तो नैतिकता ही एकमात्र सही जवाब होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पद पर रहते हुए हितों का टकराव हो सकता था, इसलिए जांच को पारदर्शी बनाने के लिए उन्होंने पद छोड़ना ही बेहतर समझा। पूर्व गृह मंत्री ने मीडिया, युवाओं और आम नागरिकों से ईमानदारी के रास्ते पर चलने की अपील की। उन्होंने कहा कि अगर हम बदलाव चाहते हैं, तो हमें आत्म-शुद्धि करनी होगी। उन्होंने मीडिया पर भी निशाना साधा और कहा कि कुछ मीडियाकर्मियों के ‘पसंदीदा शेयरों’ की जानकारी भी समय आने पर सामने आएगी। उन्होंने कहा कि जो लोग ‘राम राज्य’ की कल्पना करते हैं, उनमें त्याग करने का साहस होना चाहिए। नेपाल की राजनीति में यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब हाल ही में एक और मंत्री पर कार्रवाई हुई है। 9 अप्रैल को प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने श्रम, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा मंत्री दीपक कुमार शाह को बर्खास्त कर दिया था। उन पर अनुशासनहीनता और पद के दुरुपयोग के आरोप थे। जांच में पाया गया कि दीपक कुमार शाह ने अपनी पत्नी जुनु श्रेष्ठ को स्वास्थ्य बीमा बोर्ड का सदस्य बनाए रखने के लिए अपने पद का गलत इस्तेमाल किया था। पार्टी की अनुशासन समिति की रिपोर्ट के बाद प्रधानमंत्री ने उन्हें पद से हटाने की सिफारिश की थी।