बाँदा-युवाओं का दृष्टिकोण जल संकट को कम करने एवं सतत विकास को बढ़ावा देने में निभा सकता है महत्वपूर्ण भूमिका

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युवाओं के व्यवहार और सहभागिता” विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि जल संसाधन प्रबंधन में युवाओं का व्यवहार और सहभागिता केवल योगदान नहीं बल्कि परिवर्तन का स्रोत है।
राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय के झलकारी बाई सभागार में प्राचार्य प्रो. दीपाली गुप्ता तथा गैर-सरकारी संस्था इंस्टीट्यूट फॉर वॉटर एंड क्लाइमेट इनिटीएटिवस की सीईओ प्रशंसा गुप्ता के संयुक्त तत्वाधान में “जल संसाधन प्रबंधन में युवाओं के व्यवहार और सहभागिता” विषय पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान सीईओ प्रशंसा गुप्ता ने सभी प्राध्यापको और छात्राओं को बताया कि,जल हमारे जीवन का आधार है। यह न केवल पीने के लिए आवश्यक है। बल्कि कृषि,उद्योग,ऊर्जा और पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। लेकिन वर्तमान समय में जल संकट गंभीर रूप से बढ़ता जा रहा है। भारत सहित कई देशों में जल का अत्यधिक दोहन,प्रदूषण और असमान वितरण जल समस्या को गहराता है। ऐसे में युवाओं की भूमिका जल संसाधन प्रबंधन में निर्णायक हो सकती है। बताया कि,स्कूल और कॉलेजों में जल संरक्षण क्लब बनाकर विद्यार्थियों को अभियानो और परियोजनाओं में शामिल किया जाए। इसके अतिरिक्त शोध कार्यों एवं विज्ञान प्रदर्शनी में जल संसाधनों पर परियोजनाएँ युवा विज्ञानियों द्वारा तैयार कराया जाएं। सामुदायिक तालाब,झरना,नदी और नालों के किनारे सफाई अभियान चलाया जाएं। तभी हम जल को संरक्षित और अन्य के लिए उपयोगी बना सकते हैं। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से छात्राओं ने जल संरक्षण एवं प्रबंधन के बारे में जागरूक किया। प्राचार्य प्रो.दीपाली गुप्ता ने बताया कि,जल संसाधन प्रबंधन में युवाओं का व्यवहार और सहभागिता केवल योगदान नहीं बल्कि परिवर्तन का स्रोत है। उनका सक्रिय और जिम्मेदार दृष्टिकोण जल संकट को कम करने एवं सतत विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यदि युवाओं को सही दिशा, संसाधन एवं प्रेरणा मिले, तो वे जल संरक्षण के क्षेत्र में अमूल-चूल परिवर्तन ला सकते हैं। इस अवसर पर समस्त प्राध्यापक एवं कार्यालय स्टॉफ उपस्थित रहा।
UP TIMES NEWS
Author: UP TIMES NEWS

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