प्रयागराज-43 साल पुराने हत्याकांड में आरोपी सजा से हुए बरी

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बांदा के पैलानी थाना क्षेत्र में करीब 43 साल पुराने हत्या के मामले में हाईकोर्ट ने दो आरोपियों को सात साल की सजा से बरी कर दिया है। न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी ने मामले की सुनवाई के बाद आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप को संदेह से परे साबित नहीं कर सका।
अभियोजन के अनुसार, 27-28 सितंबर 1983 की रात बांदा के पैलानी थाना क्षेत्र के अलीना गांव में दीनदयाल अपनी पत्नी धुरिया और बेटे रामाधार के साथ घर के बरामदे में सो रहे थे। आरोप था कि तीन लोग दीवार फांदकर घर में घुसे थे। जगनायक के पास तमंचा, संतोष के पास फरसा और रामराज के पास लाठी थी। विरोध करने पर दीनदयाल को गोली मारी गई और फरसे से हमला किया गया। बचाने पहुंची धुरिया के सिर पर भी लाठी मारी गई। हमले में दीनदयाल की मौत हो गई, जबकि धुरिया घायल हो गई थीं। घटना के मामले में बांदा के विशेष न्यायाधीश ने 25 जनवरी 1985 को तीनों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 460 के तहत दोषी मानते हुए सात-सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। सुनवाई के दौरान अदालत ने अभियोजन के साक्ष्यों को दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं माना और दो आरोपियों को सजा से बरी कर दिया।
आरोपियों की ओर से अधिवक्ता रामरक्षा तिवारी ने पैरवी की।
यह था पूरा मामला
अभियोजन के मुताबिक, घर में घुसे लोगों ने दीनदयाल और उन्हें बचाने आई उनकी पत्नी पर हमला किया था। दीनदयाल की मौत हो गई थी और धुरिया घायल हुई थीं। मामले में लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद हाईकोर्ट ने दो आरोपियों को राहत दी।
अदालत का फैसला
हाईकोर्ट ने अभियोजन पक्ष के आरोपों को संदेह से परे साबित न पाए जाने पर दो आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। अदालत के इस फैसले से उन्हें पहले सुनाई गई सात साल की सजा से राहत मिली।
UP TIMES NEWS
Author: UP TIMES NEWS

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