सप्ताह में दूसरी बार पेट्रोल के दामों में बढ़ोतरी हुई है। दाम बढ़ाये जाने पर सरकार की चारो तरफ आलोचना हो रही है।
आम आदमी की जेब पर एक बार फिर बोझ बढ़ गया है। मंगलवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर से वृद्धि हो गई है. सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने आज से पेट्रोल और डीजल के दाम में 90-90 पैसे प्रति लीटर की अतिरिक्त वृद्धि करने का ऐलान किया है. यह एक सप्ताह के भीतर दोनों प्रमुख ईंधनों के भाव में दूसरी बढ़ोतरी है. नए भाव तत्काल प्रभाव से लागू हो चुके हैं. इससे पहले 15 मई को भी दामों में 3-3 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि की गई थी। कच्चे तेल में उछाल के चलते बढ़ाये गए दाम?
सरकार का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है, जिसके कारण तेल कंपनियों को दाम बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। हालांकि ध्यान देने वाली बात है कि कच्चे तेल के भाव मार्च की शुरुआत से ही ऊपर चल रहे हैं. कई लोगों का कहना है कि पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के कारण पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़ाए जा रहे थे. अब जब चुनाव संपन्न हो गए हैं और पांचों राज्यों में नई सरकारों का गठन हो गया है, तेल कंपनियों ने दाम बढ़ाने की शुरुआत कर दी है। आम लोगों पर पड़ रही महंगाई की मार
बहरहाल, एक हफ्ते के अंदर दूसरी बार दाम बढ़ने से आम लोगों, ट्रांसपोर्टरों और व्यापारियों पर असर पड़ रहा है। इससे ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ेगा, जिसका सीधा असर सब्जी, फल, दूध और अन्य जरूरी चीजों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। सरकार और तेल कंपनियां समय-समय पर पेट्रोल-डीजल के दामों की समीक्षा करती रहती हैं। अभी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जैसी स्थितियां बन रही हैं, फिलहाल आम लोगों को महंगे डीजल और पेट्रेाल से कोई राहत मिलने के संकेत नहीं हैं।
दाम बढ़ने से सरकार की हो रही आलोचना
दिल्ली-मुंबई समेत कई शहरों में लोग इस बढ़ोतरी से नाराज हैं। खासकर मध्यम वर्ग और छोटे व्यापारी इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं. कई लोग सोशल मीडिया पर सरकार की नीतियों की आलोचना कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड के भाव रिकॉर्ड निचले स्तर पर थे, तब तो पेट्रोल और डीजल के भाव कम नहीं किए गए थे।