बाल विवाह, किशोर अपराध, हिंसा और महिला संबंधी अपराधों की प्रभावी रोकथाम को लेकर पुलिस ने मासिक समीक्षा बैठक में अधिकारियों और संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। लापता बच्चों की तलाश में तेजी लाने के साथ ही बरामद बालिकाओं की चिकित्सीय जांच, पीड़ित बच्चों के संरक्षण और पुनर्वास पर विशेष जोर दिया गया।
पुलिस लाइन में गुरुवार को विशेष किशोर पुलिस इकाई (एसजेपीयू) और जनपदीय बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न हितधारकों की मासिक समीक्षा बैठक हुई। अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. शिवराज की अध्यक्षता में हुई बैठक में लापता बच्चों की सूचना समय से सीसीटीएनएस और वात्सल्य पोर्टल पर फीडबैक के साथ अपडेट करने के निर्देश दिए गए। बरामद बालिकाओं का नियमानुसार आंतरिक चिकित्सीय परीक्षण कराने की प्रक्रिया भी समझाई गई।
महिला पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि अपराध से पीड़ित होने की स्थिति में जरूरत के अनुसार काउंसलिंग कराते हुए आंतरिक चिकित्सीय परीक्षण अनिवार्य रूप से कराया जाए। पीड़िता का धारा 180 बीएनएसएस के तहत बयान केवल महिला उपनिरीक्षक या उससे ऊपर के अधिकारी द्वारा ही दर्ज किया जाए। पीड़िता के बयान की पुष्टि कॉल रिकॉर्ड और परिजनों के बयानों से भी करने को कहा गया। विवेचकों को निर्देश दिए गए कि पीड़िता कितने दिन घर से बाहर रही, कहां-कहां रही, किसके साथ रही और उसके साथ क्या अपराध हुआ, इन सभी तथ्यों से संबंधित पर्याप्त और सुसंगत साक्ष्य जुटाए जाएं। चार माह से अधिक समय से बरामद नहीं हुई बालिकाओं के मामलों में लैंगिक शोषण की संभावना मानते हुए एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) से कार्रवाई कराने के निर्देश दिए गए। पीड़ित बच्चों की गोपनीयता और पुनर्वास पर जोर
बैठक में पीड़ित बच्चों की गोपनीयता बनाए रखने और उन्हें बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष प्रस्तुत करने पर जोर दिया गया। ऐसे बच्चों के संरक्षण, देखरेख और पुनर्वास को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों (सीएनसीपी) तथा विधि का उल्लंघन करने वाले बच्चों (सीसीएल) के संबंध में भी विस्तार से जानकारी दी गई। बार-बार अपराध करने वाले किशोरों के पुनर्वास के निर्देश
बैठक में बताया गया कि यदि कोई नाबालिग अपराध में संलिप्त पाया जाता है तो गंभीर अपराधों को छोड़कर ऐसे मामलों में, जिनमें अधिकतम सजा सात वर्ष से कम है, उसके विरुद्ध चार्जशीट की कार्रवाई नहीं की जाएगी। बार-बार अपराध में संलिप्त पाए जाने वाले बच्चों के पुनर्वास, सुधार और उचित संरक्षण के लिए बाल संरक्षण विभाग के माध्यम से आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय के प्रतिनिधि, जिला विद्यालय निरीक्षक, जीआरपी, आरपीएफ, चाइल्डलाइन, आशा ज्योति केंद्र, विधि-सह-परिवीक्षा अधिकारी, एसजेपीयू, एएचटीयू, ग्रामीण स्वावलंबन समिति, ग्रामीण परंपरा विकास संस्थान, साथी संस्था और गुमशुदा सेल समेत संबंधित विभागों एवं संस्थाओं के अधिकारी व प्रतिनिधि मौजूद रहे।