बाँदा-हत्या में उम्रकैद पा चुके तीन दोषियों को हुई गैंगस्टर एक्ट में चार-चार साल की सजा

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हत्या समेत गंभीर आपराधिक मामलों में सजा पा चुके तीन अभियुक्तों को गैंगस्टर एक्ट के मामले में विशेष अदालत ने दोषसिद्ध किया है। विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट/अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीपाल सिंह ने 8 अक्टूबर को रामबहादुर सिंह उर्फ दाऊ सिंह, कल्लू सिंह और बलराम उर्फ बल्लू को उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम की धारा 3 के तहत दोषी माना। अदालत ने तीनों को चार-चार वर्ष के कठोर कारावास और छह-छह हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर प्रत्येक को दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।

मामला कोतवाली नगर के मु0अ0सं0 653/2014 से संबंधित है। अभियोजन के अनुसार तीनों संगठित गिरोह बनाकर आपराधिक गतिविधियों में लिप्त थे और आर्थिक एवं भौतिक लाभ के लिए अपराध करते थे। इनके आपराधिक इतिहास और आधारभूत मुकदमों के आधार पर गैंगचार्ट तैयार किया गया था। अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई।
अभियोजक सौरभ सिंह ने बताया कि रामबहादुर सिंह उर्फ दाऊ सिंह गिरोह का नेतृत्व करता था, जबकि कल्लू सिंह, सुशील सिंह और बलराम उर्फ बल्लू उसके सक्रिय सदस्य बताए गए। गैंगचार्ट में हत्या, हत्या के प्रयास, लूट वसूली, मारपीट, धमकी, शस्त्र अधिनियम, गुंडा एक्ट और गैंगस्टर एक्ट समेत कई मुकदमों का उल्लेख किया गया। अभियोजन के अनुसार हत्या के एक मामले में भी संबंधित अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा हो चुकी है। मामले में शुरुआत में चार अभियुक्त थे। विचारण के दौरान सुशील सिंह की मृत्यु हो गई, जिसके बाद उसके विरुद्ध कार्यवाही समाप्त कर दी गई। शेष तीन अभियुक्तों के विरुद्ध सुनवाई जारी रही।
अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर माना दोषी
अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक गैंगस्टर एक्ट सौरभ सिंह ने गैंगचार्ट, आपराधिक इतिहास, आधारभूत मुकदमों के अभिलेख, एफआईआर, जीडी, आरोपपत्र और अभियोजन स्वीकृति समेत दस्तावेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। बचाव पक्ष ने अभियुक्तों को निर्दोष बताते हुए अभियोजन के साक्ष्यों और गैंगचार्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने धारा 3 गैंगस्टर एक्ट का अपराध सिद्ध माना।
सजा के बाद कारागार भेजे गए आरोपी
अदालत ने पूर्व में बिताई गई अभिरक्षा की अवधि को नियमानुसार सजा में समायोजित करने का आदेश दिया। फैसला सुनाए जाने के बाद तीनों दोषसिद्ध अभियुक्तों को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जिला कारागार बांदा भेज दिया गया। अभियोजन की पैरवी में पैरोकार अभिलाष यादव तथा कोर्ट मुहर्रिर रघुनाथ मौर्य और अमित कुमार का सहयोग रहा।
UP TIMES NEWS
Author: UP TIMES NEWS

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