समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गोरखपुर संगठन को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए पार्टी की पूरी जिला इकाई भंग कर दी है। जिला संगठन के साथ ही पार्टी के विभिन्न फ्रंटल संगठनों को भी भंग कर दिया गया है। इस फैसले के बाद गोरखपुर में सपा संगठन में व्यापक बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है।
पार्टी के भीतर लगातार सामने आ रहे विवादों के बीच यह निर्णय लिया गया है। शनिवार को गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब में आयोजित सपा की प्रेस वार्ता के दौरान बैठने की जगह को लेकर पार्टी नेताओं और समर्थकों के बीच विवाद हो गया था। मामला कहासुनी से बढ़कर हाथापाई तक पहुंच गया। पूर्व जिलाध्यक्ष राम नगीना साहनी को थप्पड़ मारे जाने का आरोप भी सामने आया था। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ। विवाद के दौरान गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से टिकट की दावेदारी कर रहे अंशुमान सिंह के समर्थकों और पूर्व जिलाध्यक्ष राम नगीना साहनी के बीच टकराव हुआ। दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे पर आरोप लगाए गए। जिला अध्यक्ष ब्रजेश गौतम ने मामले की जानकारी पार्टी नेतृत्व तक पहुंचाने की बात कही थी। संगठन में नए सिरे से बदलाव की तैयारी
जिला इकाई भंग किए जाने के बाद अब गोरखपुर में सपा संगठन का नए सिरे से गठन किया जाएगा। जिला स्तर के साथ फ्रंटल संगठनों में भी नए पदाधिकारियों को जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना है। कार्रवाई को पार्टी नेतृत्व की ओर से संगठन में अनुशासन और आपसी समन्वय मजबूत करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। चुनाव से पहले गुटबाजी पर सख्ती
2027 विधानसभा चुनाव से पहले गोरखपुर जैसे महत्वपूर्ण जिले में संगठन के भीतर गुटबाजी और नेताओं के बीच सार्वजनिक विवाद पार्टी के लिए चिंता का विषय बना है। प्रेस वार्ता में हुआ विवाद इसी खींचतान का ताजा उदाहरण माना जा रहा है। अब संगठन भंग करने के फैसले के बाद पार्टी नेतृत्व की नजर नए पदाधिकारियों के चयन और सभी गुटों के बीच संतुलन बनाने पर होगी। प्रेस वार्ता के दौरान हुआ था विवाद
सपा की प्रेस वार्ता में कुर्सी पर बैठने को लेकर विवाद शुरू हुआ था। इसके बाद अंशुमान सिंह के समर्थकों और राम नगीना साहनी के बीच कहासुनी और हाथापाई हुई। मामले ने पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को सार्वजनिक कर दिया। नई टीम पर निगाहें
जिला इकाई और फ्रंटल संगठनों के भंग होने के बाद अब पार्टी की नई टीम पर सभी की निगाहें रहेंगी। नए गठन में संगठनात्मक सक्रियता, आपसी समन्वय और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को प्रमुखता मिलने की संभावना है।