दिल्ली-25 साल की सजा पूरी होने का दावा, फिर भी जेल से बाहर नहीं आएगा अबू सलेम

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गैंगस्टर अबू सलेम को समय से पहले जेल से रिहाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उसकी याचिका खारिज करते हुए तत्काल रिहाई देने से इनकार कर दिया। सलेम ने दावा किया था कि भारत में वह 25 वर्ष की कैद पूरी कर चुका है और प्रत्यर्पण के दौरान भारत की ओर से पुर्तगाल को दिए गए आश्वासन के तहत उसे इससे अधिक अवधि तक जेल में नहीं रखा जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के अप्रैल 2026 के आदेश को बरकरार रखा, जिसमें सलेम की रिहाई की मांग को समय से पहले माना गया था। सुप्रीम कोर्ट के विस्तृत आदेश का इंतजार है। अबू सलेम को 1993 के मुंबई सीरियल बम धमाकों के मामले में दोषी ठहराया जा चुका है। उसे 11 नवंबर 2005 को पुर्तगाल से भारत प्रत्यर्पित किया गया था। प्रत्यर्पण के दौरान भारत ने पुर्तगाल को आश्वासन दिया था कि उसे मृत्युदंड नहीं दिया जाएगा और उसकी कैद की अवधि 25 वर्ष से अधिक नहीं होगी। सलेम ने इसी शर्त को आधार बनाकर अपनी रिहाई की मांग की थी। सलेम की ओर से यह भी दलील दी गई थी कि जेल में बिताई गई अवधि, अंडरट्रायल के तौर पर बिताया गया समय और अच्छे आचरण के आधार पर मिली रिमिशन को 25 वर्ष की अधिकतम अवधि में शामिल किया जाना चाहिए। हालांकि अदालत ने उसकी मांग को स्वीकार नहीं किया।
25 साल की अवधि को लेकर क्या है मामला?
सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2022 में कहा था कि भारत सरकार को पुर्तगाल को दिए गए संप्रभु आश्वासन का पालन करना होगा और 25 वर्ष की अवधि पूरी होने पर रिहाई से संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया के लिए कदम उठाने होंगे। हालांकि अदालत ने उस समय भी सजा को सीधे कम करने का आदेश नहीं दिया था।
1993 मुंबई ब्लास्ट मामले में उम्रकैद
अबू सलेम को सितंबर 2017 में 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। इसके अलावा मुंबई के बिल्डर प्रदीप जैन की हत्या के मामले में भी उसे उम्रकैद की सजा मिली है। सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद फिलहाल उसकी तत्काल रिहाई का रास्ता बंद हो गया है।
UP TIMES NEWS
Author: UP TIMES NEWS

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