अलीगढ़-पत्नी ने प्रेमी संग मिलकर कराई पति की हत्या, दोनों को उम्रकैद

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बरला कस्बे में प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड सुरेश कुमार की गोली मारकर हत्या के मामले में अदालत ने उसकी पत्नी बीना और उसके प्रेमी मनोज को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 35-35 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अदालत में फैसला सुनाए जाने के दौरान बीना फफककर रोने लगी, लेकिन उसके तीनों बच्चों ने मां की ओर देखने से भी परहेज किया। वहीं, सुनवाई के दौरान छोटी बेटी रोशनी ने अपनी मां के लिए फांसी की सजा की मांग की थी।
अवैध संबंधों का पति करता था विरोध
अभियोजन पक्ष के अनुसार, बरला कस्बे के मोहल्ला कोठी निवासी 36 वर्षीय सुरेश कुमार नोएडा में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करता था। उसकी पत्नी बीना के गांव के ही मनोज पुत्र रामगोपाल से संबंध थे। सुरेश को पत्नी के संबंधों की जानकारी थी और वह इसका विरोध करता था। इसे लेकर दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था। आरोप है कि इसके बाद बीना ने प्रेमी मनोज के साथ मिलकर पति को रास्ते से हटाने की साजिश रची।
घर के बाहर बैठा था सुरेश, तभी प्रेमी ने मारी गोली
घटना 10 जुलाई 2025 की सुबह करीब 8:30 बजे की है। सुरेश के भाई विजय सिंह भी घर के बाहर मौजूद थे। इसी दौरान मनोज वहां पहुंचा। अभियोजन के मुताबिक, बीना ने मनोज से सुरेश को गोली मारने के लिए कहा। इसके बाद मनोज ने तमंचा निकालकर सुरेश के सीने में गोली मार दी। गोली लगने से सुरेश की मौके पर ही मौत हो गई।
बचाने दौड़े भाई पर भी किया फायर
सुरेश को गोली लगते ही उसका भाई विजय सिंह बचाने के लिए दौड़ा। आरोप है कि मनोज ने उस पर भी फायर कर दिया। गोली विजय के कान के पास से निकलकर दीवार में जा लगी। छर्रे लगने से उसका चेहरा भी घायल हुआ। वारदात के बाद मनोज खुद थाने पहुंचा और पुलिस के सामने हत्या करने की बात कहते हुए गिरफ्तारी की मांग की। विजय सिंह की तहरीर पर बीना और मनोज के खिलाफ हत्या समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।
15 साल के बेटे की गवाही बनी अहम कड़ी
मुकदमे में मृतक के 15 वर्षीय बेटे नीतेश की गवाही अभियोजन के लिए बेहद महत्वपूर्ण रही। नीतेश ने अदालत में अपनी मां के खिलाफ बयान दिया। इसके अलावा मृतक के भाई विजय सिंह समेत कुल आठ गवाहों के बयान कराए गए। चिकित्सकीय साक्ष्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, एफएसएल रिपोर्ट, तमंचा, कारतूस और मोबाइल समेत अन्य साक्ष्य भी अदालत के सामने रखे गए।
जज ने बेटी से पूछा- क्या सजा होनी चाहिए?
सजा सुनाए जाने से पहले अदालत में मौजूद मृतक की छोटी बेटी रोशनी से न्यायाधीश ने उसकी इच्छा पूछी। इस पर बच्ची भावुक होकर रो पड़ी और कहा कि उसे अपनी मां से कोई लगाव नहीं है, क्योंकि उसकी मां ने उसके पिता को मरवा दिया। उसने अपनी मां को फांसी देने की मांग की। बच्ची के इन शब्दों से अदालत का माहौल बेहद भावुक हो गया।
फैसला सुनते ही मां की ओर देखने से कतराए बच्चे
सुरेश की मौत और मां के जेल जाने के बाद उसके तीनों बच्चे—बड़ा बेटा नीतेश, मंझला बेटा पुनीत और छोटी बेटी रोशनी—अपनी बुआ कसूरी के सहारे हैं। फैसला सुनाए जाने के दिन तीनों बच्चे बुआ के साथ अदालत पहुंचे थे। कोर्ट में बीना बार-बार बच्चों की ओर देखती रही, लेकिन बच्चों ने उसकी तरफ नजर तक नहीं उठाई। सजा सुनते ही बीना फूट-फूटकर रोने लगी। वहीं उसके प्रेमी मनोज के चेहरे पर कोई शिकन नहीं दिखी।
छह महीने में पूरा हुआ मुकदमा
अभियोजन पक्ष के अनुसार, अदालत में पांच फरवरी 2026 को आरोप तय हुए थे और करीब छह महीने में मुकदमे का ट्रायल पूरा कर लिया गया। अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय तोष कुमार शर्मा की अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर बीना और मनोज को दोषी माना। दोनों को आजीवन कारावास के साथ 35-35 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
मुकदमा दर्ज कराने वाले भाई की भी हो गई थी मौत
इस मामले में एक और दुखद घटनाक्रम सामने आया। मुकदमा दर्ज कराने वाले सुरेश के भाई विजय सिंह ने अदालत में गवाही दी थी। गवाही के कुछ समय बाद उसे बीना की जमानत होने की जानकारी मिली। इसके बाद सदमे में 19 अप्रैल को गांव में उसकी मौत हो गई।
बच्चों को मिलेगी अर्थदंड की आधी रकम
अदालत ने अर्थदंड की राशि को लेकर भी आदेश दिया है। दोषियों से वसूली जाने वाली कुल 35 हजार रुपये की धनराशि में से आधी राशि मृतक के बच्चों को देने और शेष राशि राज्य कोष में जमा करने का आदेश दिया गया है।
UP TIMES NEWS
Author: UP TIMES NEWS

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