गौ आश्रय स्थलों में संरक्षित गौवंश को नियमित रूप से पर्याप्त हरा चारा,भूसा के पशु आहार उपलब्ध कराये जाने के कमिश्नर ने निर्देश दिए हैं। कहा कि किसी भी दशा में पशुओं के भरण-पोषण में लापरवाही न बरती जाए।
शनिवार को आयुक्त चित्रकूटधाम मण्डल अजीत कुमार की अध्यक्षता में निराश्रित गोवंश संरक्षण हेतु संचालित गौ आश्रय स्थलों के संचालन,प्रबंधन एवं गौवंश के भरण-पोषण की व्यवस्थाओं की समीक्षा बैठक आयुक्त सभागार में सम्पन्न हुई। बैठक में आयुक्त ने शासन द्वारा नामित डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, निदेशक रोग नियंत्रण एवं प्रक्षेत्र,पशुपालन विभाग, उत्तर प्रदेश लखनऊ,संयुक्त विकास आयुक्त चित्रकूटधाम मण्डल बाँदा,डॉ.अशोक कुमार अपर निदेशक-।। पशुपालन विभाग चित्रकूटधाम मण्डल तथा मुख्य विकास अधिकारी, बाँदा सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में गौ आश्रय स्थलों की पर्यावरणीय,वित्तीय एवं अवस्थापना संबंधी व्यवस्थाओं के साथ-साथ पशु आहार,चिकित्सा एवं संरक्षित गोवंश के समुचित रखरखाव की गहन समीक्षा की गई। नोडल अधिकारी द्वारा समस्त संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि गौ आश्रय स्थलों में संरक्षित गौवंश को नियमित रूप से पर्याप्त हरा चारा,भूसा एवं मानक के अनुसार पशु आहार उपलब्ध कराया जाए। किसी भी दशा में पशुओं के भरण-पोषण में लापरवाही न बरती जाए। बैठक में कमिश्नर ने निर्देशित किया कि समस्त गौ आश्रय स्थलों में स्थापित सीसीटीवी कैमरे पूर्णतः क्रियाशील रखे जाएं। ग्राम पंचायतों की सहभागिता सुनिश्चित करने हेतु सूचना पट्ट एवं बैनर प्रमुख स्थानों पर लगाए जाएं। कुपोषित एवं कमजोर गौवंशों को विशेष पोषणयुक्त आहार उपलब्ध कराने तथा उनके स्वास्थ्य परीक्षण की नियमित व्यवस्था सुनिश्चित करने के कमिश्नर ने निर्देश दिए हैं।वर्तमान में बढ़ती गर्मी एवं लू के दृष्टिगत गौवंशों के संरक्षण हेतु विशेष सावधानियां बरतने के निर्देश देते हुए कहा गया कि गौ आश्रय स्थलों में बोरा/टाट पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव कराया जाए। पर्याप्त छायादार व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा स्वच्छ एवं पर्याप्त पेयजल की उपलब्धता बनाए रखी जाए। नोडल अधिकारी द्वारा निर्देशित किया गया कि गौ आश्रय स्थलों में वर्मी कम्पोस्ट एवं बायोगैस प्लांट स्थापित कर उन्हें नियमित रूप से क्रियाशील रखा जाए।उत्पन्न गैस का उपयोग विद्युत एवं अन्य सामान्य कार्यों में किया जाए। जिससे ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ गौ आश्रय स्थल आत्मनिर्भर एवं स्वावलंबी बन सकें। बैठक में समस्त खण्ड विकास अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वह गौ आश्रय स्थलों का नियमित निरीक्षण करें। निरीक्षण आख्या संबंधित अभिलेखों में अनिवार्य रूप से अंकित करें। साथ ही पाई गई कमियों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए।आयुक्त अजीत कुमार ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि सीएम की महत्वाकांक्षी योजना ‘‘गौ संरक्षण एवं गौ संवर्धन’’ को पूर्ण संवेदनशीलता एवं उत्तरदायित्व के साथ प्रभावी ढंग से संचालित किया जाए। तथा गौवंशों के स्वास्थ्य,सुरक्षा एवं समुचित देखभाल पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि गौ आश्रय स्थलों का संचालन केवल औपचारिकता न होकर जनभागीदारी एवं संवेदनशीलता के साथ किया जाना चाहिए। जिससे निराश्रित गोवंशों को सुरक्षित एवं बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।