रात में हुई बारिश के बाद मंदाकिनी नदी के बढ़े जलस्तर का प्रशासन ने स्थलीय जायजा लिया। रामघाट पर नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने के बावजूद वर्तमान में इसमें गिरावट का रुझान बना हुआ है। प्रशासन ने नदी किनारे और जलभराव वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से सतर्कता बरतने की अपील की है।
सिंचाई विभाग के फ्लड कंट्रोल रूम, प्रथम कर्वी के अनुसार रामघाट पर मंदाकिनी नदी का खतरे का निशान 126.500 मीटर है। शनिवार दोपहर 12 बजे जलस्तर 126.700 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से 20 सेंटीमीटर अधिक है। आयुक्त चित्रकूटधाम मंडल बांदा अजीत कुमार ने जलस्तर की स्थिति का जायजा लेकर संबंधित अधिकारियों को लगातार निगरानी रखने और जलस्तर में होने वाले प्रत्येक परिवर्तन की तत्काल उच्चाधिकारियों को सूचना देने के निर्देश दिए।
आयुक्त ने कहा कि जिला एवं मंडल प्रशासन स्थिति पर सतत निगरानी रखे हुए है। संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित की गई हैं। उन्होंने स्थानीय लोगों से अनावश्यक रूप से नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों के पास नहीं जाने तथा मौसम एवं जलस्तर की स्थिति को देखते हुए सावधानी बरतने की अपील की।
प्रशासन की ओर से संभावित बाढ़ की स्थिति में प्रभावित लोगों के ठहरने, भोजन, पेयजल और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत-बचाव कार्यों में तेजी से कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। अर्बन पीएचसी का औचक निरीक्षण
इसके बाद आयुक्त ने अर्बन पीएचसी सीतापुर का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान चिकित्सक और समस्त स्टाफ उपस्थित मिला। स्वास्थ्य केंद्र में साफ-सफाई, दवाओं की उपलब्धता, पेयजल सहित अन्य व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया गया, जो संतोषजनक पाई गईं। वर्षा और संभावित जलभराव के चलते जलजनित बीमारियों की आशंका को देखते हुए आयुक्त ने स्वास्थ्य विभाग को सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर आवश्यक दवाओं और चिकित्सकीय सुविधाओं की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के निर्देश दिए। डायरिया, उल्टी-दस्त, टाइफाइड, पीलिया सहित अन्य जलजनित रोगों के संभावित मामलों की निगरानी बढ़ाने और जरूरत के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सकीय टीमें भेजने को कहा गया। लोगों को स्वच्छ पेयजल के इस्तेमाल, पानी को उबालकर या शुद्ध करके पीने तथा व्यक्तिगत स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के निर्देश भी दिए गए। वर्षा और जलभराव वाले क्षेत्रों में नियमित स्वास्थ्य निगरानी के साथ आवश्यकता पड़ने पर स्वास्थ्य शिविर लगाने तथा बीमारी के प्रकोप की सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया। आयुक्त अजीत कुमार ने कहा कि जनसुरक्षा और जनस्वास्थ्य प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मौसम की वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ पूरी तत्परता से कार्य करें।