फर्जी आईएएस विप्रा शर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप में एक और रिपोर्ट दर्ज की गई है। अब तक उस पर 22 मामले दर्ज हो चुके है।
बरेली के गोल्डन ग्रीन पार्क निवासी फर्जी आईएएस विप्रा शर्मा के खिलाफ बारादरी थाने में धोखाधड़ी के आरोप में एक और रिपोर्ट दर्ज की गई है। अब उस पर दर्ज मामलों की संख्या 22 हो गई है। फतेहगंज पश्चिमी क्षेत्र के गांव फरीदापुर रामचरन निवासी रिंकू मौर्य ने बताया कि विप्रा शर्मा ने खुद को एडीएम बताकर सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा दिया था। विप्रा ने उससे तीन लाख रुपये की मांग की थी। विप्रा को एक लाख रुपये विश्वास करके दे दिए। बाकी दो लाख रुपये नौकरी लगने के बाद देने की बात तय हुई थी। बाद में पता चला कि विप्रा शर्मा कोई अधिकारी नहीं, बल्कि जालसाज महिला है। बारादरी थाने में रिंकू ने रिपोर्ट कराई है। पुलिस विप्रा और उसके गिरोह की कुंडली खंगाल रही है।
अपने आपको आईएएस बताती थी विप्रा
खुद को आईएएस बताकर विप्रा और उसकी दो बहनें बेरोजगार युवाओं को जाल में फंसाकर उनसे ठगी करती थीं। इसका खुलासा तब हुआ जब फाइक एन्क्लेव निवासी प्रीति लॉयल ने बारादरी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने जांच के बाद 28 अप्रैल को विप्रा और उसकी दोनों बहनों को गिरफ्तार किया था। विप्रा लग्जरी कार से ड्राइवर और गनर लेकर चलती थी, जिससे लोग उसे असली अफसर समझकर झांसे में आ जाते थे, लेकिन जब विप्रा और उसकी बहनों की सच्चाई सामने आई तो पीड़ित सन्न रह गए। ठगी के शिकार पीड़ित अब लगातार सामने आ रहे हैं और रिपोर्ट दर्ज करा रहे हैं। गिरोह के अन्य सदस्यों पर कसेगा शिकंजा
फर्जी आईएएस बनकर लोगों को चूना लगाने वाली विप्रा और उसके गिरोह के अन्य सदस्यों पर पुलिस का शिकंजा कसता जा रहा है। पुलिस ने विप्रा, उसकी बहन शिखा, ममेरी बहन दीक्षा, ड्राइवर विनोद और पिता रिटायर सिंचाई अधिकारी वीरेंद्र के खातों की जांच पड़ताल शुरू कर दी है। करीब 55 लाख रुपये की रकम फ्रीज कराई जा चुकी है। अब पुलिस इस बिंदु पर भी जांच कर रही है कि खातों में ये रकम कहां से आई और कहां इन लोगों ने इसे निवेश किया। अभी अन्य पीड़ित और आरोपी सामने आ सकते हैं। एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि भविष्य में चार्जशीट होने के बाद गैंगस्टर की रिपोर्ट कर इनकी अवैध कमाई और संपत्ति को प्रशासन की मदद से जब्त किया जा सकता है।