धार्मिक स्थल को गृहकर का बिल भेजे जाने से नगर निगम की कर निर्धारण प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए। करीब 60 साल पुराने हनुमान मंदिर के नाम पर चालू वित्तीय वर्ष के कर, पुराने बकाये और ब्याज समेत 976 रुपये जमा करने का बिल जारी किया गया। मामला सामने आने के बाद नगर निगम प्रशासन ने बिल निरस्त कराने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
झांसी के गुदरी के वार्ड 20 में बड़ागांव गेट क्षेत्र स्थित हनुमान मंदिर के नाम पर वित्तीय वर्ष 2026-27 का गृहकर बिल जारी किया गया है। बिल में चालू वित्तीय वर्ष का 98 रुपये कर, 784 रुपये पुराना बकाया और 94 रुपये ब्याज शामिल है। इसमें कर निर्धारण की तिथि एक अप्रैल 2018 दर्ज है। मंदिर के मुख्य पुजारी उमाशंकर त्रिपाठी ने बिल मिलने के बाद पार्षद निधि नीरज वर्मा को मामले की जानकारी दी। पार्षद ने नगर निगम के कर अधिकारी से संपर्क कर बिल निरस्त करने की मांग की। मंदिर के नाम पर गृहकर का नोटिस जारी होने से कर निर्धारण की प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। धार्मिक स्थलों को गृहकर से छूट का प्रावधान
नियमानुसार सार्वजनिक पूजा-अर्चना और धर्मार्थ कार्यों के लिए पूरी तरह इस्तेमाल होने वाले भवनों एवं भूमि को सामान्य कर यानी गृहकर से छूट का प्रावधान है। ऐसे में मंदिर के नाम पर बिल जारी होने से संपत्ति के सत्यापन और कर निर्धारण की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। नगर निगम ने शुरू की बिल निरस्त करने की कार्रवाई
अपर नगर आयुक्त राहुल कुमार यादव के मुताबिक, जीआईएस सर्वे के बाद गृहकर बिल वितरित किए जा रहे हैं। मंदिर के नाम पर बिल जारी होने की जानकारी कर विभाग को मिल गई है। इसे निरस्त कराने की कार्यवाही शुरू कर दी है।