कृषि विज्ञान केंद्र में बुधवार को यू-पी एग्रीज परियोजना के प्रायोजन में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें परियोजना में चयनित 25 प्रसारकर्मियों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का उद्देश्य लघु एवं सीमांत किसानों की फसल उत्पादकता बढ़ाकर उनकी आय में वृद्धि करना और कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक पद्धतियों को बढ़ावा देना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों को पुष्पगुच्छ भेंट कर किया गया। जिला परियोजना प्रबंधक डा. अमर सिंह ने यू-पी एग्रीज परियोजना के उद्देश्यों और कार्ययोजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विश्व बैंक समर्थित यह परियोजना प्रदेश के 28 जनपदों में संचालित है। बांदा में बबेरू, बिसंडा, नरैनी और कमासिन के 120 गांवों में योजना संचालित की जा रही है। कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डा. श्याम सिंह ने प्रशिक्षणार्थियों को कृषि में वैज्ञानिक सोच अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बुंदेलखंड में जल और मृदा जैसे प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर जोर देते हुए मेड़बंदी, गर्मी की गहरी जुताई, मल्चिंग और एकीकृत फसल प्रणाली अपनाने की सलाह दी। परियोजना के कृषि विशेषज्ञ डा. सुरेश सिंह ने कृषक समूह गठित करने और समूहों में प्रदर्शन आयोजित कराने के लिए निर्धारित गाइडलाइन की जानकारी दी। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान किसानों को फसल उत्पादन का पूर्ण पैकेज उपलब्ध कराने पर जोर दिया। प्रसार वैज्ञानिक डा. दीक्षा पटेल ने कृषक उत्पादन समूह बनाने की प्रक्रिया समझाई। कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ उपप्रबंधक कृषि धर्मेंद्र सिंह पटेल ने सभी के प्रति आभार जताया। परियोजना का दायरा
यू-पी एग्रीज परियोजना बांदा के चार आकांक्षी विकासखंडों के 120 गांवों में संचालित की जा रही है। इसका उद्देश्य किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाने के साथ कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक एवं आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम में सहयोग
कार्यक्रम में परियोजना के कृषि विशेषज्ञ डा. सुरेश सिंह, उपप्रबंधक मत्स्य विनोद कुमार समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में कृषि विज्ञान केंद्र के प्रक्षेत्र प्रबंधक धनश्याम यादव, स्टेनो कमल नारायण बाजपेयी और एसआरएफ निकरा डा. प्रदीप कुमार वर्मा का विशेष योगदान रहा।