बाँदा-नाबालिग को आत्महत्या के लिए उकसाना पड़ा भारी, दो दोषियों को 10-10 साल की सजा

SHARE:

वर्ष 2021 में नाबालिग को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में अदालत ने दो दोषियों को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दोनों पर 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। पुलिस की प्रभावी विवेचना और अभियोजन की पैरवी के बाद यह फैसला आया।
मामला जनपद के थाना कमासिन क्षेत्र का है। 18 नवंबर 2021 को भोल्लन ने थाना कमासिन में सूचना दी थी कि उनकी नाबालिग पुत्री ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली है। आरोप लगाया था कि गांव के ही एक व्यक्ति द्वारा उनकी पुत्री को यह कदम उठाने के लिए उकसाया गया था। सूचना के आधार पर थाना कमासिन में मुकदमा अपराध संख्या 152/2021 धारा 305 भादवि के तहत अभियोग दर्ज किया गया। मामले की विवेचना तत्कालीन उपनिरीक्षक सुरेन्द्र प्रताप ने की। विवेचना के दौरान साक्ष्यों को संकलित करते हुए आरोपपत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया। मिशन शक्ति अभियान के तहत चिन्हित अभियोगों में चलाए जा रहे ऑपरेशन कन्विक्शन के क्रम में पुलिस और अभियोजन की ओर से मामले में प्रभावी पैरवी की गई।
दोनों दोषियों को 10-10 साल का कठोर कारावास
अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन की प्रभावी पैरवी के आधार पर ददोला उर्फ राजकुमार पुत्र महेश निवासी ग्राम चकरेही, थाना कमासिन, बांदा तथा त्रिभुवन उर्फ सतीश पुत्र रामदीन निवासी ग्राम उसरपुरवा, थाना अतर्रा, बांदा को दोषी करार दिया। दोनों को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास तथा 10-10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया।
अभियोजन की पैरवी से मिली सजा
पुलिस अधीक्षक बांदा पलाश बंसल के निर्देशन में मामले में प्रभावी अभियोजन एवं पैरवी की गई। लोक अभियोजक सुशील कुमार तिवारी ने न्यायालय में प्रभावी पैरवी की। कोर्ट मुहर्रिर आरक्षी दीपक कुमार तथा पैरोकार आरक्षी पुरुषोत्तम के प्रयासों से अभियोजन की कार्रवाई को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया गया।
UP TIMES NEWS
Author: UP TIMES NEWS

Leave a Comment

सबसे ज्यादा पड़ गई