बाँदा-आठ लाख की लूट का हिसाब 16 साल बाद हुआ पूरा, तीन गैंगस्टरों को 5-5 साल की सजा

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फायरिंग कर आठ लाख रुपये लूटने के मामले में गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई का अदालत ने फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों को दोषसिद्ध कर दिया। विशेष गैंगस्टर अदालत ने तीनों को पांच-पांच वर्ष के कठोर कारावास और छह-छह हजार रुपये अर्थदंड लगाया है।

अभियोजन के अनुसार पांच जनवरी 2010 की रात करीब 10 बजे हरपाल सिंह आहूजा मकान के सौदे के आठ लाख रुपये लेकर कार संख्या यूपी 90 ई 7925 से घर लौट रहे थे। उनके साथ चालक समी सरदार भी था। घर के पास पहुंचते ही मोटरसाइकिल से आए तीन बदमाशों ने वाहन को रोककर फायरिंग शुरू कर दी। इस दौरान समी सरदार के दाहिने हाथ में गोली लग गई। बदमाश वाहन में रखी आठ लाख रुपये की रकम से भरी प्लास्टिक की बोरी लेकर मोटरसाइकिल से फरार हो गए।
घटना के बाद घायल समी सरदार को अस्पताल ले जाया गया और थाना कोतवाली नगर में सूचना देकर मुकदमा दर्ज कराया गया। विवेचना के दौरान अभियोजन साक्ष्यों के अनुसार लूटी गई रकम में से तीन लाख रुपये कपिल की दुकान से बरामद किए गए। पुलिस ने घटना से संबंधित अन्य साक्ष्यों को भी संकलित किया। मामले में वादी निरीक्षक दयाशंकर सिंह रहे, जबकि विवेचना मनोज कुमार कौशिक ने की। विवेचना के दौरान अभियुक्तों के आपराधिक इतिहास, आधारभूत मुकदमे, गैंगचार्ट, प्राथमिकी, जीडी रपट, अभियोजन स्वीकृति समेत आवश्यक अभिलेख जुटाए गए। विवेचना पूरी होने के बाद आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। अभियोजन के अनुसार कपिल पुत्र हनुमान दास गुप्ता निवासी ब्योठा, थाना कोतवाली नगर, बांदा, पुनीत पुत्र स्व. माता प्रसाद निवासी डीएवी कॉलेज के पास, बारी मोहल्ला, थाना कोतवाली नगर, बांदा तथा मन्नू उर्फ महमूद उल्ला पुत्र स्व. महबूब निवासी हाथीखाना, अलीगंज, थाना कोतवाली नगर, बांदा संगठित रूप से गिरोह बनाकर आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त थे और अपराधों के माध्यम से आर्थिक एवं भौतिक लाभ अर्जित करते थे। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से गैंगचार्ट, प्राथमिकी, जीडी कायमीनामा, आरोपपत्र, अभियोजन स्वीकृति तथा आधारभूत मुकदमे से संबंधित अभिलेख न्यायालय में प्रस्तुत कराए गए। बचाव पक्ष ने अभियुक्तों को निर्दोष बताते हुए अभियोजन के साक्ष्यों और गैंगचार्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट/अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीपाल सिंह ने दोनों पक्षों की दलीलों और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद माना कि अभियोजन ने कपिल, पुनीत और मन्नू उर्फ महमूद उल्ला के खिलाफ उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम, 1986 की धारा 3 का अपराध संदेह से परे साबित कर दिया है।
जुर्माना न देने पर दो माह का अतिरिक्त कारावास
अदालत ने तीनों दोषसिद्ध अभियुक्तों को पांच-पांच वर्ष के कठोर कारावास और छह-छह हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा नहीं करने पर प्रत्येक को दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। अदालत ने तीनों के सजायावी वारंट तैयार कर उन्हें तत्काल जिला कारागार, बांदा भेजने के निर्देश दिए। पूर्व में बिताई गई अभिरक्षा की अवधि को नियमानुसार सजा में समायोजित करने का आदेश भी दिया गया।
दो अभियुक्तों की पत्रावली पहले हो चुकी है अलग
मामले में प्रारंभिक स्तर पर पांच अभियुक्तों का उल्लेख था। न्यायालय के आदेश के अनुसार रफत उल्ला और श्रीमती जैनब के न्यायालय में उपस्थित नहीं होने के कारण उनकी पत्रावलियां पूर्व में अलग कर दी गई थीं। वर्तमान निर्णय कपिल, पुनीत और मन्नू उर्फ महमूद उल्ला के विरुद्ध विचारण से संबंधित है। मामले में राज्य की ओर से विशेष लोक अभियोजक गैंगस्टर एक्ट सौरभ सिंह ने प्रभावी पैरवी की। पैरवी में पैरोकार अभिलाष यादव, कोर्ट मुहर्रिर रघुनाथ मौर्य और अमित कुमार का सहयोग रहा। साक्षियों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने तथा आवश्यक अभिलेख न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कराने में भी इनकी भूमिका रही।
UP TIMES NEWS
Author: UP TIMES NEWS

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