बारह साल पहले घर से नाराज होकर निकला एक व्यक्ति अचानक पुलिस के सामने मिला तो उसकी पहचान करना चुनौती बन गई। भाषा की समस्या के कारण वह अपना नाम-पता स्पष्ट नहीं बता पा रहा था। पुलिस ने संवेदनशीलता दिखाते हुए उसकी काउंसलिंग कराई और पहचान के लिए लगातार प्रयास किए। आखिरकार वीडियो कॉल के जरिए उसके भाई से संपर्क हुआ और वर्षों से लापता व्यक्ति की पहचान हो गई।
जनपद के बदौसा थाना क्षेत्र में 25 अगस्त की शाम फतेहगंज तिराहे पर पुलिस चेकिंग के दौरान एक व्यक्ति संदिग्ध परिस्थितियों में मिला। पुलिस टीम ने उसे रोककर सामान्य पूछताछ की, लेकिन उसकी भाषा स्पष्ट रूप से समझ में नहीं आ रही थी। वह अपना नाम-पता और निवास स्थान भी स्पष्ट नहीं बता पा रहा था। शुरुआती पूछताछ में उसने अपना नाम मो. सफीउर्रहमान पुत्र हुसैन अली और खुद को बोंगाईगांव का निवासी बताया।
काउंसलिंग के बाद सामने आया असली पता
पुलिस उसे थाना बदौसा लेकर आई। वहां उसे सांत्वना देकर दोबारा पूछताछ की गई और अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. शिवराज ने उसकी काउंसलिंग भी की। काउंसलिंग एवं बातचीत के बाद व्यक्ति ने अपना नाम मो. सफीउर्रहमान पुत्र हुसैन अली, उम्र करीब 45 वर्ष, निवासी ग्राम वरगुला, जिला बोंगाईगांव, असम बताया।
उसके बताए पते की पुष्टि के लिए पुलिस ने इंटरनेट के माध्यम से संबंधित थाना क्षेत्र से संपर्क स्थापित किया। इसके बाद उसके भाई शुजाउल हक निवासी ग्राम बलारपेट, पोस्ट तिलपुखुरी, थाना अभयापुरी, जिला बोंगाईगांव, असम से फोन पर संपर्क किया गया। वीडियो कॉल पर भाई ने देखते ही की पहचान
पुलिस ने वीडियो कॉल के माध्यम से शुजाउल हक की उसके भाई मो. सफीउर्रहमान से पहचान कराई। भाई ने वीडियो कॉल पर उसे देखते ही पहचान लिया। पहचान की पुष्टि के लिए पुलिस ने उसके भाई से पहचान संबंधी दस्तावेज व्हाट्सऐप के माध्यम से मंगवाए और उनमें दर्ज विवरण का व्यक्ति द्वारा बताए गए विवरण से मिलान किया। शुजाउल हक ने बताया कि उसका भाई करीब 12 वर्ष पहले घर से नाराज होकर चला गया था। इसके बाद से वह लापता था। परिवार ने काफी तलाश की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल सका। पुलिस द्वारा मो. सफीउर्रहमान की फोटो और वीडियो भी भाई को भेजकर पहचान कराई गई, जिसके बाद परिजनों ने उसकी पहचान की पुष्टि कर दी। 12 साल बाद फिर अपनों के बीच पहुंचने की उम्मीद
पहचान की पुष्टि होने के बाद परिवार ने पुलिस को बताया कि वे मो. सफीउर्रहमान को लेने के लिए बांदा आ रहे हैं। परिजनों के पहुंचने के बाद नियमानुसार अग्रिम विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. शिवराज ने पूरे मामले की जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस ने व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किया। काउंसलिंग, स्थानीय स्तर पर पूछताछ और असम के संबंधित थाना क्षेत्र से संपर्क के बाद उसके परिवार का पता लगाया गया। पुलिस की इस पहल से करीब 12 साल से परिवार से बिछड़े व्यक्ति के अपनों से दोबारा मिलने का रास्ता साफ हुआ है।