दहेज की मांग पूरी न होने पर विवाहिता की हत्या के मामले में अदालत ने पति, सास और ससुर को दोषी करार देते हुए 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। तीनों दोषियों पर पांच-पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। पुलिस की प्रभावी विवेचना और अभियोजन की पैरवी के चलते मिशन शक्ति अभियान के तहत चिह्नित इस मामले में ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत दोषियों को सजा दिलाई गई।
अतर्रा थाना क्षेत्र में रेलवे क्रॉसिंग के पास रहने वाली हमीदन ने दो मार्च 2024 को गिरवां थाने में सूचना दी थी कि उनकी बेटी की शादी वर्ष 2018 में गिरवां थाना क्षेत्र के ग्राम तरखरी निवासी हमीद से हुई थी। आरोप था कि शादी के बाद से ही ससुरालीजन दहेज की मांग को लेकर विवाहिता को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे। दहेज की मांग पूरी न होने पर ससुरालीजनों ने एक मार्च 2024 को विवाहिता की फांसी लगाकर हत्या कर दी। मामले में गिरवां थाने में मुकदमा अपराध संख्या 62/2024 के तहत धारा 498ए, 304बी भादवि और 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम में मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की विवेचना तत्कालीन क्षेत्राधिकारी नरैनी अम्बुजा त्रिवेदी ने की। विवेचना के दौरान साक्ष्यों को संकलित करते हुए 16 अगस्त 2024 को आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया। इसके बाद लोक अभियोजक सुशील कुमार तिवारी ने न्यायालय में प्रभावी पैरवी की। कोर्ट मोहर्रिर आरक्षी दीपक कुमार और पैरोकार आरक्षी प्रदीप सतोइया के अथक प्रयासों से सत्र न्यायालय बांदा ने आरोपी पति हमीद पुत्र राजअली, सास जौहरा पत्नी राजअली और ससुर राजअली पुत्र कल्लू, सभी निवासी ग्राम तरखरी थाना गिरवां, को दोषी करार दिया। न्यायालय ने तीनों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास और पांच-पांच हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। गौरतलब हो कि ऑपरेशन कनविक्शन के तहत एसपी पलाश बंसल ने मुकदमें में प्रभावी पैरवी कराये जाने के निर्देश दिए थे।