उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर पनप रहे आक्रोश को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए प्रीपेड की अनिवार्यता खत्म कर दी है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रीपेड स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता खत्म कर दी है और सभी स्मार्ट मीटरों को पोस्टपेड मोड में बदलने का फैसला किया है। तकनीकी समस्याओं और बिलिंग में गड़बड़ी की लगातार आ रही शिकायतों के बाद यह बड़ा फैसला लिया गया है। अब आपको एडवांस में रिचार्ज करने की टेंशन लेने की जरूरत नहीं है, बल्कि हर महीने बिल आएगा जिसे चुकाने के लिए आपको पर्याप्त समय मिलेगा। आइए समझते हैं इस नए बदलाव की पूरी कहानी और आपके लिए इसका क्या मतलब है। उत्तर प्रदेश सरकार ने बिजली बिलिंग सिस्टम को लेकर एक बड़ा अपडेट जारी किया है। अब राज्य के सभी स्मार्ट मीटर पोस्टपेड मीटर की तरह काम करेंगे। दरअसल, लोगों को अपने बिजली बिल और मीटर को लेकर कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। अचानक बिजली कटना, रिचार्ज करने के बाद भी बिजली चालू होने में देरी होना और भारी-भरकम बिल आना आम बात हो गई थी। इन्हीं परेशानियों को दूर करने के लिए, राज्य सरकार ने अनिवार्य प्रीपेड सिस्टम को खत्म कर दिया है और सभी यूजर्स को वापस पुराने और सुविधाजनक पोस्टपेड बिलिंग सिस्टम पर शिफ्ट कर दिया है।
आक्रोश कर चलते किया गया बदलाव
उत्तर प्रदेश सरकार ने बिजली क्षेत्र के आधुनिकीकरण और वित्तीय नुकसान को कम करने के उद्देश्य से साल 2020-2021 में ‘प्रीपेड स्मार्ट मीटर’ की शुरुआत की थी। इस व्यवस्था की सबसे बड़ी शर्त यह थी कि उपभोक्ताओं को बिजली का उपयोग करने के लिए मोबाइल की तरह पहले से रिचार्ज करना अनिवार्य था। हालांकि, यह महत्वाकांक्षी योजना जल्द ही विवादों में घिर गई। इस सिस्टम में कई ऐसी गंभीर तकनीकी खामियां उभरकर आईं, जिन्होंने आम जनता की मुश्किलों को बढ़ा दिया। सबसे बड़ी समस्या तब होती थी जब लोग रिचार्ज तो कर लेते थे, लेकिन तकनीकी देरी के कारण उनकी बिजली समय पर वापस नहीं आती थी। इसके साथ ही, गलत बिलिंग और बिना किसी स्पष्ट कारण के अकाउंट से अचानक पैसे कट जाने की शिकायतों ने उपभोक्ताओं में भारी असंतोष पैदा कर दिया।जनता की बढ़ती नाराजगी और लगातार मिल रही शिकायतों के बाद, सरकार ने इस पूरे सिस्टम की गहन समीक्षा की। नतीजतन, अब सभी स्मार्ट मीटरों को ‘पोस्टपेड मोड’ में बदलने का एतिहासिक फैसला लिया गया है। इस निर्णय के तहत, राज्य के लगभग 75 लाख कनेक्शनों को, जिन्हें पहले प्रीपेड में बदला गया था, अब बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के वापस पोस्टपेड कर दिया जाएगा। इससे उपभोक्ताओं को बिल भरने के लिए पर्याप्त समय और मानसिक राहत मिल सकेगी। स्मार्ट मीटर है बिजली मापने की मशीन?
स्मार्ट मीटर असल में बिजली मापने की एक आधुनिक और डिजिटल मशीन है, जो आपके घर में होने वाली बिजली की खपत का हिसाब ‘रियल-टाइम’ में रखती है। यह पुराने जमाने के एनालॉग मीटरों से काफी अलग और एडवांस है, क्योंकि इसमें रीडिंग लेने के लिए किसी कर्मचारी को आपके घर आने की जरूरत नहीं पड़ती। यह मीटर खुद ही सारा डेटा सीधे बिजली विभाग के सर्वर पर भेज देता है। इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे बिल बिल्कुल सटीक बनता है, जिससे गलत रीडिंग या ‘मैनुअल एरर’ जैसी इंसानी गलतियों की गुंजाइश खत्म हो जाती है। इसके अलावा, स्मार्ट मीटर की एक बड़ी खासियत यह भी है कि बिजली विभाग इसे दफ्तर में बैठकर दूर से ही कंट्रोल कर सकता है, जिससे लोड मैनेजमेंट और बिजली की निगरानी करना पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा आसान और पारदर्शी हो गया है।