चित्रकूट-अशोह विस्फोट में कौशांबी कनेक्शन से जांच को मिली नई दिशा

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विस्फोट की घटना में मृत युवक की पहचान अब तक नहीं हो सकी है। जांच में घटनास्थल से मिले झोले के कौशांबी से जुड़े होने की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस की पड़ताल को नई दिशा मिली है। पुलिस अब झोला बेचने वाले दुकानदार से जानकारी जुटाने के साथ उसे खरीदने वाले व्यक्ति तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। घटना के बाद से एसआईटी, एसओजी, सर्विलांस और थाना पुलिस की कई टीमें अलग-अलग बिंदुओं पर जांच में जुटी हैं।
जनपद चित्रकूट के पहाड़ी थाना क्षेत्र के अशोह गांव में 12 सितंबर की शाम भाजपा आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ के क्षेत्रीय संयोजक जगदीश प्रसाद गौतम के खाली प्लॉट में तेज विस्फोट हुआ था। घटनास्थल पर मानव अंगों के टुकड़े, मांस के लोथड़े, एक झोला और मच्छरदानी मिली थी। फॉरेंसिक टीम ने मौके से नमूने एकत्र किए हैं। पुलिस लगातार आसपास के खेतों और झाड़ियों में शरीर के अन्य हिस्सों की तलाश कर रही है। विस्फोट के बाद अब तक सिर्फ दो कटे और बुरी तरह जले हुए पैर बरामद हुए हैं। सिर और धड़ समेत शरीर के अन्य हिस्सों का पता नहीं चल सका है। पोस्टमार्टम के आधार पर बरामद पैरों से युवक की उम्र 25 वर्ष से अधिक होने का अनुमान लगाया गया है। पुलिस को यह भी आशंका है कि विस्फोट के दौरान कोई दूसरा व्यक्ति घायल हुआ हो सकता है। इसी संभावना को देखते हुए चित्रकूट के साथ कौशांबी के अस्पतालों में भी घायल मरीजों की जानकारी जुटाई जा रही है।
कौशांबी से जुड़ा झोला बना अहम सुराग
घटनास्थल से मिले झोले की जांच के दौरान पता चला कि इसी तरह का झोला कौशांबी की एक दुकान से बेचा गया था। दुकानदार ने पुलिस को इसकी जानकारी दी है। इसके बाद जांच टीम दुकान से झोला खरीदने वाले लोगों का विवरण जुटा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि झोला किसने खरीदा था और वह किस माध्यम से अशोह तक पहुंचा।
234 मोबाइल नंबर सर्विलांस पर
इससे पहले पुलिस ने अशोह, बाबूपुर और आसपास के गांवों में घटना के समय सक्रिय रहे 234 से अधिक मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लगाया था। इन नंबरों की गतिविधियों और संपर्कों की जांच की जा रही है। साथ ही ग्रामीणों, खेतों में काम करने वाले मजदूरों और चरवाहों से भी पूछताछ की गई है। घटनास्थल की ओर आने-जाने वाले रास्तों के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है।
खदानों और होटल-ढाबों के मजदूरों पर भी नजर
पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए खदानों में काम करने वाले मजदूरों की भी जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। भरतकूप क्षेत्र की खदानों में पुलिस टीमों ने पहुंचकर मजदूरों के संबंध में जानकारी ली। इसके अलावा पहाड़ी और आसपास के होटल-ढाबा संचालकों से वहां काम करने वाले मजदूरों का रिकॉर्ड मांगा गया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि हाल के दिनों में कोई मजदूर अचानक लापता तो नहीं हुआ। चित्रकूट सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण यहां सतना, रीवा, पन्ना और बिहार समेत दूसरे क्षेत्रों से मजदूर आकर होटल-ढाबों और खदानों में काम करते हैं। पुलिस इन सभी संभावनाओं को ध्यान में रखकर मृतक की शिनाख्त के प्रयास कर रही है।
चार राज्यों की पुलिस से मांगी गुमशुदगी की जानकारी
मृतक की पहचान के लिए पुलिस ने बिहार समेत चार राज्यों की पुलिस से संपर्क कर हाल के दिनों में दर्ज हुई गुमशुदगी की रिपोर्ट की जानकारी मांगी है। चित्रकूट और कौशांबी के थानों में भी पिछले एक महीने में दर्ज गुमशुदगी के मामलों को खंगाला जा रहा है। एसपी अरुण कुमार सिंह के नेतृत्व में गठित टीमें पहचान और विस्फोट में इस्तेमाल सामग्री के स्रोत का पता लगाने में लगी हैं।
विस्फोटक के स्रोत की भी जांच
घटनास्थल से बरामद अवशेषों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि विस्फोट किस प्रकार की सामग्री से हुआ। जांच में जिलेटिन, डेटोनेटर या किसी अन्य विस्फोटक सामग्री की संभावना को भी देखा जा रहा है। विस्फोटक से जुड़े मामले को देखते हुए प्रारंभिक जानकारी एटीएस और एनआईए तक भी भेजे जाने की बात सामने आई है।
चील-कौओं पर भी पुलिस की नजर
घटनास्थल पर बिखरे मानव अवशेषों को सुरक्षित रखने के लिए पुलिस विशेष निगरानी कर रही है। मांस के टुकड़ों को खाने के लिए पहुंच रहे चील-कौओं समेत अन्य पक्षियों पर भी नजर रखी जा रही है, ताकि जांच से जुड़े साक्ष्य नष्ट न हों। पुलिस की टीमें खेतों में लगातार सर्च अभियान चला रही हैं।
जांच जारी:
पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह के मुताबिक युवक की पहचान के लिए टीमें लगाई गई हैं। पहचान होने के बाद ही घटना की पूरी कड़ी स्पष्ट हो सकेगी। वहीं पहाड़ी थाना प्रभारी निशिकांत राय के अनुसार फॉरेंसिक और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर विस्फोट के कारण तथा अवैध विस्फोटक के स्रोत का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
UP TIMES NEWS
Author: UP TIMES NEWS

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