मेरठ-नीला ड्रम हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा

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पति सौरभ राजपूत की नृशंस हत्या के चर्चित मामले में अदालत ने दोषियों को कठोरतम सजा सुनाई है। इस मामले में हत्या के बाद शव को छिपाने और साक्ष्य मिटाने से जुड़े तथ्यों पर सुनवाई के बाद अदालत ने मृत्युदंड का फैसला सुनाया।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने बुधवार को चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई। सजा सुनाए जाने से पहले दोनों को जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया गया। अदालत ने दोनों से पूछा कि वे सजा सुनाए जाने से पहले कुछ कहना चाहते हैं या नहीं। दोनों ने कहा कि उन्हें कुछ नहीं कहना है। फैसला सुनाए जाने के बाद मुस्कान भावुक होकर रोने लगी, जबकि साहिल की आंखें भी नम हो गईं। मुस्कान ने अपनी दोनों बेटियों की देखभाल किए जाने की गुजारिश की थी।
सीमेंट से भरे नीले ड्रम में मिला था शव
अभियोजन पक्ष के अनुसार, सौरभ राजपूत की हत्या मार्च 2025 में की गई थी। हत्या के बाद शव के टुकड़े कर उन्हें नीले प्लास्टिक ड्रम में छिपाया गया और सीमेंट के घोल से ढक दिया गया था। सौरभ के भाई की शिकायत पर पुलिस ने जांच शुरू की थी। 19 मार्च 2025 को घर से ड्रम में छिपाया गया शव बरामद हुआ था। पुलिस ने मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार कर मामले की जांच पूरी की। अदालत ने 30 सितंबर 2026 को दोनों को दोषी करार दिया था और सजा पर फैसला सुरक्षित रखा था।
अभियोजन ने की मृत्युदंड की मांग
अभियोजन पक्ष ने वारदात की गंभीरता, क्रूरता और साक्ष्य मिटाने के तरीके का हवाला देते हुए दोनों दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी। बचाव पक्ष ने मुस्कान की दो बेटियों के भविष्य और पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला देकर सजा में नरमी बरतने की अपील की थी। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सजा सुनाई। मामले में परिस्थितिजन्य, इलेक्ट्रॉनिक और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन पक्ष ने अपना मामला प्रस्तुत किया था।
जांच में जुटाए गए वैज्ञानिक साक्ष्य
मामले में प्रत्यक्षदर्शी नहीं होने के कारण पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन, होटल के रजिस्टर, सीसीटीवी फुटेज और फॉरेंसिक रिपोर्ट सहित विभिन्न साक्ष्यों की कड़ियां जोड़ी थीं। अभियोजन पक्ष ने इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर अदालत में पैरवी की। सुनवाई के दौरान 22 अभियोजन गवाहों के बयान दर्ज किए गए और करीब 125 से अधिक तारीखों के बाद अदालत ने फैसला सुनाया।
UP TIMES NEWS
Author: UP TIMES NEWS

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