साइबर ठगों ने टेलीकॉम और जांच एजेंसियों के अधिकारी बनकर एक डॉक्टर को तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा। आधार से जुड़े मोबाइल नंबर के आपराधिक गतिविधियों में इस्तेमाल होने और सीबीआई की जांच में फंसे होने का डर दिखाकर गिरफ्तारी की धमकी दी गई। इसके बाद जांच के नाम पर 48 लाख 20 हजार 500 रुपये आरटीजीएस करा लिए गए। ठगी का पता चलने पर पीड़ित ने साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई।
मामला कानपुर के स्वरूपनगर थाना क्षेत्र का है। यहां शयनिका अपार्टमेंट निवासी 65 वर्षीय डॉक्टर योगेश चंद्र मिश्रा ने प्राथमिकी में बताया कि 10 सितंबर की दोपहर करीब 2:30 बजे उनके मोबाइल पर अज्ञात नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को टेलीकॉम अथॉरिटी ऑफ इंडिया का अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि डॉक्टर के आधार से जुड़े मोबाइल नंबर का इस्तेमाल मुंबई के तिलकनगर में धमकी भरी कॉल, अश्लील सामग्री और अन्य आपराधिक गतिविधियों में किया गया है।
इसके बाद कॉल करने वाले ने अपना नाम रवि शर्मा और कोड आईडी बताई तथा व्हाट्सएप पर इंटरपोल और सीबीआई से संबंधित बताए गए कई दस्तावेज भेजे। बाद में कॉल अन्य लोगों को ट्रांसफर की गई, जिन्होंने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच और सीबीआई का अधिकारी बताया। डॉक्टर पर गंभीर आपराधिक मामले और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े होने का आरोप लगाते हुए गिरफ्तारी और जेल भेजने की धमकी दी गई। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के नाम पर तीन दिन रखा डिजिटल अरेस्ट
ठगों ने डॉक्टर की उम्र अधिक होने का हवाला देकर घर से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पूछताछ में शामिल होने की बात कही। इसी बहाने उन्हें तीन दिन तक अपने निर्देशों के मुताबिक रखा गया। कमरे से बाहर निकलने और किसी परिजन या अन्य व्यक्ति से संपर्क करने से मना किया गया। मोबाइल पर किसी दूसरे व्यक्ति से बातचीत नहीं करने की भी हिदायत दी गई।बठगों ने जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल के खिलाफ हुई कार्रवाई का हवाला देते हुए दावा किया कि बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में डॉक्टर का आधार नंबर तथा उनके बैंक खाते में 40 लाख रुपये होने की जानकारी मिली है। इसके बाद जांच के नाम पर रकम ट्रांसफर करने का दबाव बनाया गया। 24 से 72 घंटे में रकम लौटाने का दिया भरोसा
साइबर ठगों ने डॉक्टर से कहा कि जांच के उद्देश्य से उनके बताए बैंक खाते में रकम आरटीजीएस करनी होगी। इसे आरबीआई खाते में जमा कराने की बात कही गई और भरोसा दिया गया कि जांच पूरी होने के बाद 24 से 72 घंटे में रकम वापस कर दी जाएगी। गिरफ्तारी के डर के बीच डॉक्टर ने अपने एसबीआई स्वरूपनगर खाते से 48,20,500 रुपये बताए गए बैंक ऑफ इंडिया खाते में आरटीजीएस कर दिए। रकम ट्रांसफर होने के बाद डॉक्टर को ठगी का अहसास हुआ और उन्होंने साइबर थाने में शिकायत की। साइबर इंस्पेक्टर अभय सिंह के अनुसार, तहरीर के आधार पर अज्ञात के खिलाफ धोखाधड़ी, आईटी एक्ट और जालसाजी की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है।बठग डॉक्टर से और रकम ऐंठने की तैयारी में थे। वह बैंक जाकर दोबारा रुपये ट्रांसफर करने वाले थे, लेकिन समय रहते बैंक अधिकारियों को सूचना देकर ट्रांजेक्शन पर रोक लगाई गई। डिजिटल अरेस्ट के दौरान डॉक्टर इतने भयभीत थे कि उन्होंने अपार्टमेंट की छठी मंजिल पर रहने वाली अपनी बेटी और दामाद तक को घटना की जानकारी नहीं दी। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर दबाव
पुलिस या किसी जांच एजेंसी का अधिकारी फोन पर गिरफ्तारी का डर दिखाकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए नहीं कहता। ऐसे मामलों में तुरंत परिवार के किसी सदस्य या भरोसेमंद व्यक्ति को जानकारी देना चाहिए। रकम ट्रांसफर हो जाए तो तत्काल 1930 पर शिकायत करने और बैंक को सूचना देने की सलाह दी गई है। संदिग्ध कॉल पर ये सावधानी जरूरी
किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर निजी खाते में रकम जमा नहीं करनी चाहिए। ओटीपी, पिन, पासवर्ड या बैंक खाते की गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। अनजान व्यक्ति के निर्देश पर स्क्रीन शेयर करने या संदिग्ध एप डाउनलोड करने से भी बचना चाहिए। मोबाइल नंबर, व्हाट्सएप चैट, स्क्रीनशॉट और बैंक ट्रांजेक्शन जैसे साक्ष्य सुरक्षित रखने चाहिए।