दहेज की मांग पूरी न होने पर विवाहिता की मौत के मामले में अदालत ने आरोपी पति और ससुर को दोषी ठहराते हुए 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोनों दोषियों पर चार-चार हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। यह कार्रवाई मिशन शक्ति अभियान के तहत चिह्नित अभियोग में ऑपरेशन कन्विक्शन के अंतर्गत प्रभावी विवेचना, अभियोजन और पैरवी के बाद हुई।
मामले में दोषी अली रजा पुत्र अली बक्श और सलमान खां पुत्र अली रजा, निवासीगण पन्नाह थाना मरका, बांदा हैं। वर्ष 2020 में मरका थाना क्षेत्र में हुई विवाहिता की मौत के मामले में दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। ग्राम शिव निवासी सिकन्दर ने 25 फरवरी 2020 को मरका थाने में सूचना दी थी कि उनकी पुत्री का विवाह वर्ष 2019 में पन्नाह गांव निवासी सलमान के साथ हुआ था। आरोप था कि विवाह के बाद से ही ससुरालीजन दहेज की मांग को लेकर विवाहिता को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे। शिकायत के अनुसार दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर 17 फरवरी 2020 को ससुरालीजनों ने विवाहिता को फांसी लगाकर मार डाला। मामले में मरका थाने में मुकदमा अपराध संख्या 14/2020 के तहत धारा 498ए, 304बी भारतीय दंड संहिता तथा 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम में मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की विवेचना तत्कालीन क्षेत्राधिकारी बबेरू राजीव प्रताप सिंह द्वारा की गई। विवेचना के दौरान प्रभावी कार्रवाई करते हुए आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया। इसके बाद अभियोजन की ओर से प्रभावी पैरवी की गई। न्यायालय ने सुनाई सजा
मामले की सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और प्रभावी पैरवी के बाद सत्र न्यायालय बांदा ने अली रजा और सलमान खां को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास तथा चार-चार हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत कार्रवाई
पुलिस के अनुसार मिशन शक्ति अभियान के तहत चिह्नित अभियोगों में ऑपरेशन कन्विक्शन के माध्यम से दोषियों को सजा दिलाने के लिए विवेचना, अभियोजन और पैरवी को प्रभावी बनाया जा रहा है। इसी क्रम में इस मामले में भी संबंधित पुलिस एवं अभियोजन टीम के प्रयास से दोनों आरोपियों को न्यायालय से सजा दिलाई गई। मामले में लोक अभियोजक सुशील कुमार तिवारी, कोर्ट मोहर्रिर आरक्षी दीपक कुमार और पैरोकार आरक्षी दिलीप कुमार की प्रभावी पैरवी रही।