शिक्षा के मंदिर में पढ़ाई के साथ आरोपी को बचाने के लिए प्रधानाचार्या ने नई पाठशाला खोली है। अभिलेखों में उम्र कम कर आरोपी को प्रधानाचार्या ने नाबालिग घोषित कर दिया। मामला संज्ञान में आने पर आयुक्त ने प्रकरण की जांच बीएसए को सौंपी है।
चित्रकूटधाम मंडल के आयुक्त अजीत कुमार ने विद्यालय के अभिलेखों में कथित हेराफेरी कर एक आरोपी को नाबालिग घोषित कराने के आरोपों की जांच के लिए बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) को निर्देश दिए हैं।
जनपद के थाना कोतवाली देहात क्षेत्र ग्राम लामा निवासी कुलदीप गुप्ता पुत्र रामकिशोर ने मंडलायुक्त अजीत कुमार को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि प्राथमिक विद्यालय भाग 1 की प्रधानाचार्य सुलेखा गुप्ता ने विद्यालय के प्रवेश रजिस्टर में ओवरराइटिंग कर हृदयांश पुत्र जसवंत सिंह कुशवाहा की जन्मतिथि 29 अक्टूबर 2002 के स्थान पर वर्ष 2003 दर्ज कर दी है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह कृत्य आरोपी को नाबालिग घोषित कर न्यायिक प्रक्रिया में अनुचित लाभ दिलाने के उद्देश्य से किया गया। शिकायत में कहा गया है कि हृदयांश पुत्र जसवंत सिंह कुशवाहा के विरुद्ध कोतवाली देहात, बांदा में मुकदमा संख्या 151/2021 धारा 147, 148, 323, 504 एवं 427 आईपीसी के तहत दर्ज है। आरोप है कि विद्यालय के प्रवेश रजिस्टर में कथित रूप से ओवरराइटिंग कर उसकी आयु कम दर्शाने का प्रयास किया गया। प्रवेश रजिस्टर में अभियुक्त की उम्र 29 अक्टूबर 2002 अंकित थी। जिसे ओवरराइटिंग करते हुए 29-10-2003 किया गया है। यही इसलिए किया गया है कि अपराध के समय से अभियुक्त नाबालिक होने का लाभ का जाएगा।
मामले को गंभीरता से लेते हुए मंडलायुक्त अजीत कुमार ने बेसिक शिक्षा अधिकारी को पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। शिकायतकर्ता ने दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि अभिलेखों में हेराफेरी कर किसी भी आरोपी को अनुचित लाभ नहीं मिलने दिया जाना चाहिए। वहीं इस सम्बंध में प्रधानाचार्या सुलेखा गुप्ता का कहना है मामला उनके पहले का है। जब अभियुक्त की टीसी निर्गत की गई है तो समय वह विद्यालय में तैनात नहीं थी। कोर्ट को भी प्रधानाचार्या ने किया गुमराह
बयान के दौरान प्रधानाचार्या सुलेखा गुप्ता ने अदालत में भी झूठी गवाही दी है। अधिवक्ता द्वारा जब यह सवाल किया गया की प्रवेश रजिस्टर में किसी भी प्रकार की कोई कमी या ओवरराइटिंग तो नहीं है। तो इस बात से प्रिंसिपल ने साफ इनकार भी कर दिया। इस संबंध में वादी का कहना है कि निश्चित तारीख पर अदालत को प्रधानाचार्या की करतूत बताई जाएगी।