विश्व मृदा स्वास्थ्य दिवस पर कृषि विशेषज्ञों के द्वारा किसानों को मृदा की जांच कराने तथा उर्वरकों की संस्तुत मात्रा ही अपनी फसलों में प्रयोग करने की सलाह दी गई।
बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विष्वविद्यालय के अन्तर्गत संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र एवं कृषि विभाग के संयुक्त तत्वाधान में शुक्रवार को ‘‘विश्व मृदा स्वास्थ्य दिवस’’ के अवसर पर मृदा स्वास्थ्य एवं प्रबन्धन विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर डा0 श्याम सिंह अध्यक्ष, डा0 एके सिंह यादव,उप कृषि निदेषक,मनोज कुमार गौतम भूमि संरक्षण अधिकारी,संजय प्रजापति, सहायक निदेशक मृदा परीक्षण प्रयोगशाला,केन्द्र के विशेषज्ञ डा0 प्रज्ञा ओझा,डा0 चंचल सिंह एवं डा0 दीक्षा पटेल समेत 60 कृषकों/महिला कृषकों ने प्रतिभाग किया। केंद्र विशेषज्ञ डॉ दीक्षा पटेल ने बताया कि विश्व मृदा स्वास्थ्य दिवस संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन द्वारा वर्ष 2014 से प्रत्येक वर्ष 05 दिसम्बर को मनाया जाता है। जिसका मुख्य उद्देश्य मानव जीवन में मिट्टी के महत्व को याद रखना तथा मृदा स्वास्थ्य एवं संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना है। वर्ष 2025 में ‘‘स्वस्थ्य शहरों के लिये स्वस्थ मृदा’’ थीम पर विश्व मृदा दिवस मनाया जा रहा है। कार्यक्रम का शुभारम्भ करते हुये केन्द्र के अध्यक्ष डा0 श्याम सिंह ने सभी का केन्द्र पर स्वागत किया। सभी प्रतिभागियों को विश्व मृदा स्वास्थ्य दिवस की महत्ता एवं उद्देश्य के बारे में अवगत कराया और कहा कि इस कार्यक्रम का मुख्य मकसद मृदा स्वास्थ्य के प्रति कृषकों में जागरूकता को बढाना है। साथ ही उन्होने कृषकों को आवाहन् किया कि सभी किसान भाई अपनी मृदा की जांच अवश्य करायें तथा उर्वरकों की संस्तुत मात्रा ही अपनी फसलों में प्रयोग करें। उप कृषि निदेषक डा0 ए0के0सिंह यादव ने कृषकों को एकीकृत पादप पोषण प्रबन्धन विषय पर विस्तारपूर्वक चर्चा करते हुये कहा कि किसान भाई गोबर की खाद,केचुआ खाद एवं जैव उर्वरकों का प्रयोग करें। जिससे मृदा स्वास्थ्य के लिये लाभकारी होगा। मनोज कुमार गौतम भूमि संरक्षण अधिकारी ने सभी कृषकों को कृषि विभाग द्वारा किसान हित में चलायी जा रही योजनाओं के बारे जागरूक किया और कहा कि किसान भाई विभाग की प्राकृतिक खेती एवं खेत तालाब योजना से जुडकर अपनी आय बढा सकते हैं। कार्यक्रम में तकनीकी सत्र का भी आयोजन किया गया जिसमें केन्द्र के विषय वस्तु विषेषज्ञ डा0 चंचल सिंह ने रबी फसलों में मृदा जनित कीट एवं ब्याधियों का प्रबन्धन,डा0 प्रज्ञा ओझा ने गृहवाटिका से मृदा स्वास्थ्य प्रबन्धन एवं डा0 दीक्षा पटेल ने मृदा स्वास्थ्य कार्डः महत्व व उपयोगिता विषय पर कृषकों को प्रशिक्षित किया। इस उपलक्ष्य पर कृषकों को रबी में उगने वाली सब्जियों की पौध जैसे बैगन,टमाटर,पत्ता गोभी,फूलगोभी एवं मिर्च का वितरण भी किया गया। कार्यक्रम के अन्त में कृषि विभाग के शारदा प्रसाद तकनीकी सहायक ने सभी कृषकों का कार्यक्रम को सफल बनाने के लिये धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में ई0 अजीत कुमार निगम,घनश्याम यादव,कमल नारायण बाजपेयी एवं श्रीमती अंकिता निगम आदि मौजूद रहे।