मेडिकल कॉलेज झांसी में आंखों के बैंक की स्थापना होने जा रही है। शासन से मंजूरी मिलने के बाद अब उपकरणों की खरीददारी की जायेगी।
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सुविधाओं का दायरा बढ़ने जा रहा है। कॉलेज के 500 बेड वाले अस्पताल में बुंदेलखंड का पहला नेत्र बैंक स्थापित किया जाएगा। जरूरी उपकरण खरीदने के लिए शासन से मंजूरी मिल गई है। अंग प्रत्यारोपण नियम के तहत पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अगले साल मार्च तक नेत्र बैंक चालू होने की उम्मीद है। इससे क्षेत्र में कॉर्निया प्रत्यारोपण के लिए अब बड़े शहरों की निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी। लोगो को इलाज में अभाव में अब इधर उधर भटकना नही पड़ेगा।
उपकरणों की खरीद को मिली मंजूरी
मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. जितेंद्र कुमार वर्ष 2012 से नेत्र बैंक बनाने की दिशा में प्रयासरत हैं। इसके बाबत कई बार शासन को प्रस्ताव भेजे गए लेकिन अब कॉलेज परिसर में अत्याधुनिक इमारत बनने से इस प्रस्ताव के सिरे चढ़ने की उम्मीद बढ़ गई है। काॅलेज प्रशासन का कहना है कि शासन ने नेत्र बैंक के लिए जरूरी उपकरणों की सूची और कीमतों का ब्योरा तलब किया था। हाल में डेढ़ करोड़ के उपकरणों की खरीद की मंजूरी मिल गई है।
चिकित्सकों की टीम का हुआ गठन
शासन ने मानव अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण नियम-2014 के तहत पंजीकरण प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया के लिए दो वरिष्ठ चिकित्सकों की टीम गठित की है। निरीक्षण टीम में राजकीय मेडिकल कॉलेज जालौन के नेत्र विभाग आचार्य डॉ. राजनाथ सिंह कुशवाहा और स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय एटा के नेत्र विभाग की सहायक आचार्य डॉ. अंजू सिंह को शामिल किया गया है। दोनों डॉक्टरों की टीम 15 दिसंबर तक अस्पताल में सुविधाओं का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी। वहीं, डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया कि नेत्र बैंक 500 बेड अस्पताल की दूसरी मंजिल पर बनेगा। टीम पहली बार निरीक्षण के लिए आ रही है। प्रधानाचार्य डॉ. मयंक सिंह ने बताया कि सब कुछ सही रहा तो मार्च तक नेत्र बैंक खुल जाएगा। समय पर कॉर्निया मिल जाने से उन मरीजों को नई दृष्टि मिल सकेगी।
इन उपकरणों की खरीददारी
काॅर्निया प्रत्यारोपण में स्पेक्युलर माइक्रोस्कोप, ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप समेत कई तरह के उपकरणों की जरूरत होती है। इसके अलावा वातानुकूलित एंबुलेंस का होना जरूरी है। आसानी से हो सकेगा इलाज
डॉ. जितेंद्र के मुताबिक मृत्यु के छह घंटे के अंदर आई बॉल (आंख) निकालनी होती है। बैंक नहीं हाेने पर छह घंटे के अंदर ही आई बॉल से कॉर्निया निकालकर प्रत्यारोपित करना पड़ता है। नेत्र बैंक बनने के बाद दान में मिली आंख को सुरक्षित रख दिया जाएगा और 72 घंटे के अंदर कॉर्निया प्रत्यारोपित किया जा सकेगा।