पकड़े गए फर्जी आईपीएस की मुश्किलें और बढ़ गई है। उसके शैक्षिणक अभिलेख भी फर्जी पाए गए हैं। शिकायत मिलने पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
गोरखपुर में खुद को आईपीएस अधिकारी बताकर वर्षों तक रौब दिखाने और वसूली के आरोपी शनि शर्मा उर्फ सनी शर्मा की असलियत पर से पर्दा उठ गया है। जन सूचना अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी में उसके शैक्षणिक दस्तावेज पूरी तरह फर्जी पाए गए हैं। जन्मतिथि, स्कूल रिकॉर्ड और प्रमाणपत्र हर स्तर पर गड़बड़ियां सामने आई हैं। इस मामले से जुड़े अहम दस्तावेज एसपी नार्थ ज्ञानेंद्र कुमार और विश्वविद्यालय के कुलसचिव को सौंप दिए गए हैं, जिसके बाद पुलिस की कार्रवाई भी तेज हो गई है। मामला दुर्मेशनंदिनी पत्नी स्व. ओमप्रकाश शर्मा, निवासी अंबेडकरनगर, पीपीगंज की शिकायत से उजागर हुआ। शिकायत के आधार पर जब बिंदुवार जांच की गई तो सनी शर्मा पुत्र रामकृष्ण शर्मा की ओर से प्रस्तुत शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की परतें खुलती चली गईं। जांच में सामने आया कि सनी शर्मा ने बाबू हरिचरन हाई स्कूल, तिघरा, पीपीगंज से कक्षा 8 का अंकपत्र और स्थानांतरण प्रमाणपत्र (टीसी) प्रस्तुत किया, जिसमें उसकी जन्मतिथि 16 मई 1992 दर्शाई गई है लेकिन जब इसी विद्यालय के प्रधानाध्यापक से मूल अभिलेखों की पुष्टि कराई गई तो तथ्य अलग मिले। स्कूल के रजिस्टर में पंजीकरण संख्या 1500 पर सनी शर्मा का नाम दर्ज ही नहीं है। साफ है कि जिस स्कूल के नाम पर दस्तावेज लगाए गए, वहां उसका कोई शैक्षणिक अस्तित्व नहीं रहा। मामला यहीं नहीं रुका। नेहरू उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, पीपीगंज के रिकॉर्ड में सनी शर्मा का प्रवेश कक्षा एक में सत्र 2009-10 में दर्ज है, जहां उसकी जन्मतिथि 2 अगस्त 1995 अंकित है। यानी दो अलग-अलग विद्यालयों में न केवल शैक्षणिक क्रम बल्कि जन्मतिथि भी अलग-अलग है। यह विरोधाभास सीधे तौर पर सुनियोजित फर्जीवाड़े की ओर इशारा करता है।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि सनी ने अपने पिता के स्थान पर मृतक आश्रित कोटे से गोरखपुर विश्वविद्यालय में चतुर्थ श्रेणी पद पर नियुक्ति पाने के लिए फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किया। आरोप है कि जानबूझकर नेहरू उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से प्राप्त वास्तविक शिक्षा को छिपाया गया और बाबू हरिचरन स्कूल के कूटरचित दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय स्तर से विस्तृत जांच की सिफारिश की गई है। इसके बाद से उसकी नौकरी पर बर्खास्तगी की तलवार लटकने की संभावना है। एसपी नार्थ ज्ञानेंद्र कुमार ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है। जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब हो कि गोरखपुर में फर्जी आईपीएस शनि शर्मा को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस ने लालच का जाल बुना था। पुलिस ने पहली पत्नी के जरिये उसे काॅल कराकर मासूम को छोड़ने के एवज में जेवर और दूसरी पत्नी से शैक्षणिक प्रमाणपत्र और प्राथमिकी वापस लेने का लालच देकर आधे घंटे तक मोबाइल पर लगातार बात करवाई गई। इसके बाद सर्विलांस की मदद से उसे दबोच लिया गया था।