लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा सचिवालय को दे दिया है।नोटिस पर विपक्ष के 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। विपक्ष ने स्पीकर पर पक्षपातपूर्ण तरीके से सदन के संचालन का आरोप लगया है। संसद में जारी गतिरोध के बीच विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विपक्ष स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया है। मंगलवार को सचिवालय को स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दे दिया गया है। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने बताया कि स्पीकर को हटाने के लिए संविधान के अनुच्छेद 94-सी के तहत लोकसभा सचिवालय को नोटिस दिया गया है। नोटिस पर 118 विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार,विपक्ष के 118 सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। हस्ताक्षर करने वाले सांसदों में कांग्रेस,डीएमके,सपा के सांसद शामिल हैं।
नोटिस में विपक्ष ने कहा है, लोकसभा स्पीकर लगातार विपक्षी सांसदों को जनहित के मुद्दे उठाने से रोक रहे हैं। नोटिस में बताया गया कि अनुच्छेद 94(सी) के तहत नोटिस दिया गया है। क्योंकि स्पीकर खुलेआम पक्षपात कर रहे हैं। विपक्ष के आठ सांसदों को मनमाने ढंग से निलंबित कर दिया गया है। उन्हें केवल लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करने के लिए दंडित किया जा रहा है। कई मौकों पर विपक्षी दलों के नेताओं को बोलने की अनुमति ही नहीं दी गई, जबकि यह उनका मौलिक अधिकार है। कांग्रेस सांसद और चीफ व्हिप के सुरेश ने कई विपक्षी पार्टियों की तरफ से लोकसभा सचिवालय को यह नोटिस दिया। गौरतलब है कि टीएमसी के सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं और न ही वे इस नोटिस का हिस्सा हैं। राहुल गांधी के न सदन में न बोले देने को लेकर जारी है हंगामा
लोकसभा में राहुल गांधी को न बोलने देने का आरोप लगाते हुए विपक्ष हंगामा कर रहा है।दरअसल 2 फरवरी को राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान पूर्व सेना प्रमुख की अप्रकाशित किताब में कथित तौर पर लिखी गई बातों को लेकर सरकार पर निशाना साधा। हालांकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज कर दिया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार के दबाव में लोकसभा स्पीकर ने राहुल गांधी को सदन में नहीं बोलने दिया। इसके बाद 4 फरवरी को पीएम मोदी का लोकसभा में संबोधन होना था, लेकिन इसे टाल दिया गया। अगले दिन लोकसभा स्पीकर ने कहा कि कई विपक्षी सांसदों का सदन में व्यवहार उग्र और लोकतांत्रिक गरिमा के अनुरूप नहीं था। ऐसे में प्रधानमंत्री की सुरक्षा को देखते हुए उनका संबोधन रद्द कर दिया गया। विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर के दावे को खारिज कर दिया और स्पीकर के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। विपक्षी सांसदों ने स्पीकर को चिट्ठी लिखकर उन पर पक्षपाती व्यवहार करने का आरोप लगाया। नोटिस में विपक्ष के आठ सांसदों को मनमाने तरीके से पूरे बजट सत्र से निलंबित करने का भी आरोप लगाया गया है, जबकि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रहे थे। विपक्ष ने ओम बिरला के उस बयान पर भी आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने कहा था कि 4 फरवरी को कई कांग्रेसी सांसद पीएम मोदी की सीट की तरफ बढ़े थे और कुछ अप्रत्याशित घटना हो सकती थी, जिसके बाद प्रधानमंत्री का संबोधन टाल दिया गया। विपक्ष का कहना है कि ये कांग्रेस सांसदों के खिलाफ फर्जी आरोप हैं। विपक्ष ने कहा, स्पीकर लोकसभा के नियमों के संरक्षक हैं। जिन पर संसदीय गरिमा को बनाए रखने की जिम्मेदारी है। लेकिन उन्होंने ही सदन में ऐसा बयान दिया। जो एक तरह से सांविधानिक पद का अपमान है। स्पीकर बिरला ने विपक्ष के नोटिस पर लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को निर्देश दिया है कि वे नोटिस की जांच करें और उस पर आगे उचित कार्यवाही करें।