जलवायु कृषि तकनीकों में नवाचार के तहत किसानो को जलवायु अनुकूल प्रजातियों के बारे में विशेष प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही उन्हें तकनीकी खेती करने के टिप्स दिए गए।
बाँदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बाँदा द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा जिले के अंगीकृत गाँव चौधरीडेरा खप्टिहाकला में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के माध्यम से भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही वित्त पोषित निकरा (National Innovations on Climate Resilient Agriculture) परियोजना के तहत फसल उत्पादन मॉड्यूल अन्तर्गत विभिन्न फसलों जैसे गेहूँ,चना,मटर,अलसी, सरसों इत्यादि के जलवायु अनुकूल प्रजातियों का प्रदर्शन कृषकों के प्रक्षेत्र किया जाना है। जिसके क्रम में अंगीकृत गाँव के चयनित 20 कृषकों के लिए केन्द्र पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। उक्त कार्यक्रम में केन्द्र के पौध सुरक्षा विशेषज्ञ,डॉ. चंचल सिंह द्वारा प्रस्तावित प्रदर्शनों के वैज्ञानिक पहलुओं से प्रतिभागी कृषक भाइयों को अवगत कराया गया।साथ ही किसानो से अनुरोध किया कि फसल बढ़वार के क्रम में यदि कोई भी असमान्यता दिखती है,तो केन्द्र से यथाशीघ्र सम्पर्क करके वैज्ञानिक सलाह अवश्य लें। यदि तकनीकी प्रक्षेत्र में कोई नया परिवर्तन महसूस हो, तब भी केन्द्र को सूचित करें। डॉ. दीक्षा पटेल विशेषज्ञ कृषि प्रसार ने प्रतिभागी कृषक भाइयों से प्रदर्शित की जा रही तकनीकों के आकलन और इनके प्रभाव को मापने का व्यावहारिक जानकारी साझा की। जबकि केन्द्र की गृह विज्ञान विशेषज्ञ, डॉ. प्रज्ञा ओझा ने कृषकों को फसलों के कटाई उपरान्त तकनीकों पर विस्तृत चर्चा की। केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष,डॉ. श्याम सिंह ने किसानो से चर्चा के क्रम में गेहूँ और अलसी की बुवाई के समय ध्यान देने योग्य सस्य वैज्ञानिक गतिविधियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। परिचर्चा के क्रम में उन्होने प्रतिभागी कृषको को बुआई मशीन के मनकीकरण के वैज्ञानिक तथ्यों पर विस्तार से विचार-विमर्श किए। कार्यक्रम के अन्त में सभी 20 प्रतिभागी कृषकों को तकनीकी निवेश के रूप गेहूँ और अलसी की जलवायु प्रजातियों के बीज को प्रदर्शन हेतु उपलब्ध कराया गया। कार्यक्रम में अजीत कुमार निगम,कमल नारायण बाजपेयी,चन्द्रशेखर,दिनेश, श्याम बरन,सभाजीत आदि मौजूद रहे।